ऐसे खुला मामला
दुष्कर्म में जेल की सजा काटने और मामले से बरी होने वाले कैंपियरगंज के खालिद ने मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर सक्रिय गिरोह की जानकारी दी थी। साथ ही जांच कराके आरोपी महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस मामले की जानकारी तत्कालीन एसएसपी डॉ. विपिन ताडा को मिली। एसएसपी ने पूरे मामले की जांच सीओ कैंट को दी। सीओ ने गहनता से जांच कर रिपोर्ट एसएसपी को दी।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 11 आपराधिक केस में महिलाएं शामिल हैं। इन मामलों में अलग-अलग आरोपी दिखाए गए हैं। मुकदमों में अलग-अलग आरोपी भी हैं, जबकि वादिनी कुछ महिलाएं ही हैं। जिन मामलों में न्यायालय के आदेश पर केस दर्ज हुए हैं, उसमें एक ही अधिवक्ता की भूमिका सामने आई है। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि हर मामले में अधिवक्ता की मुख्य भूमिका मिली है।
एसएसपी ने दर्ज कराया मुकदमा
सीओ कैंट का कहना है कि जांच करके रिपोर्ट एसएसपी को भेज दी गई थी। मगर, इसी बीच एसएसपी डॉ. विपिन ताडा का तबादला हो गया। मामले की जानकारी पीड़ित से होने पर एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने पूरे प्रकरण की फाइल को देखी और फिर एसपी सिटी को केस दर्ज कराने का आदेश दिया था। एसपी सिटी के आदेश पर कैंट पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लिया।
पहले महिला, फिर बहन ने दर्ज कराया दुष्कर्म का केस
सीओ की जांच में सामने आया है कि 2018 में राजघाट और गोरखनाथ थाने में दुष्कर्म का केस दर्ज कराने वाली महिला अपनी बहन को आगे करती है। बहन से ही खजनी थानाक्षेत्र के तीन लोगों पर दुष्कर्म का केस दर्ज करा देती है। इस मामले में आरोपी जेल भी भेजे गए। एक युवक ने विरोध किया तो उसके परिचित पर गीडा थाने में सामूहिक दुष्कर्म का केस 2021 में दर्ज करा दिया गया। इन सब मामलों में भी पैरवीकार एक ही है, जिसने कोर्ट के जरिए केस दर्ज कराने की सलाह दी थी।
विवेचक पर ही दर्ज करा दिया था मुकदमा
महिलाओं के गिरोह ने 2016 के दौरान ही कैंपियरगंज थाने में तीन लोगों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। मामले में आरोपी पहले जेल भेजे गए, फिर पुलिस ने गहनता से जांच की। अफसरों के आदेश पर जांच हुई तो पता चला कि मामला पूरी तरह से फर्जी है। विवेचक ने मामले में फाइल रिपोर्ट लगा दी।
महिला को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, उसने फिर विवेचक रहे दरोगा पर ही लूट, बलवा, धमकी देने का केस दर्ज करा दिया। इस बार उसका आरोप था कि केस की जांच के दौरान दरोगा ने उससे रुपये छीन लिए और धमकी दी। दरोगा ने सीओ बांसगांव को दिए शपथ पत्र में महिला को पेशेवर और अधिवक्ता को संरक्षक बताया है।
फर्जी केस कर ली चार लाख का सरकारी मदद
सीओ बांसगांव की जांच में सामने आया है कि न्यायालय के आदेश पर दर्ज एक केस में सरकारी मदद के चार लाख रुपये गलत तरीके से लिए गए हैं। इस मुकदमे में भी अधिवक्ता एक ही है। जबकि, इस केस की जांच कर विवेचक ने एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी थी।
दुष्कर्म का फर्जी केस दर्ज कराने वाली महिलाओं को एक अधिवक्ता का विधिक संरक्षण प्राप्त है। इस गंभीर मामले में न्यायप्रिय कार्रवाई के लिए शिकायत कराई गई थी। पुलिस की जांच से न्याय मिला। पुलिस ने केस दर्ज कर कई बेगुनाह लोगों को बचाया और अधिवक्ता पेशे को बदनाम कर गिरोह चलाने वाले पर कार्रवाई की है। कोर्ट में भी पीड़ितों की पैरवी की जाएगी। न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।- मृत्युंजय राज सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता
नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। गैंगस्टर की कार्रवाई भी होगी। मामला गंभीर है। जल्द ही विवेचना कराकर चार्जशीट दाखिल की जाएगी। - कृष्ण कुमार विश्नोई, एसपी सिटी