घर-गृहस्थी संभालने के साथ अपने शौक को पंख देना हो तो 54 साल की विभा राज गुप्ता की कहानी लोगों को प्रोत्साहित करती है। उन्होंने चार साल पहले बरेली में मैक्रम (साॅफ्ट काॅटन के रेशे) को देखा तो उसे खरीदकर अपने हाथों से सजावटी सामान बनाने शुरू किए।
घर-परिवार और आसपास के लोगों ने तारीफ की तो उनके आत्मविश्वास को और बल मिला। लोगों ने धीरे-धीरे सजावटी सामान खरीदने शुरू किए तो उन्होंने कई महिलाओं को भी इससे जोड़ा। अब यह उनके साथ ही 30 महिलाओं के रोजगार का जरिया बन गया है।
बेतियाहाता की रहने वाली विभा राज गुप्ता की शादी राजराजेश्वर से 35 साल पहले हुई थी। विभा को घर सजाने का शौक बचपन से था। इसके लिए वह तरह-तरह के आइडिया सोचा करती थीं। एक बार बेटी के ससुराल बरेली में एक दुकान में मैक्रम देखा तो उसे घर ले आईं।
कुछ अलग गिफ्ट देने के विचार से उन्होंने कुछ फ्लावर हैंगर बनाए, जो लोगों को खूब पसंद आए। फूल के दुकानदार को पहला आइटम बेचकर 750 रुपये हाथ में आए तो उन्हें आत्मनिर्भर होने की राह आसान लगी।
इसके बाद विभा लगातार इस काम में जुट गईं। बच्चों और परिवार के उत्साहवर्धन करने पर विभा ने सजावटी के साथ ही मैक्रम के अन्य सामान बनाकर अपने साथ और भी महिलाओं को रोजगार दे दिया। संवाद
मुंबई से आता है धागा, तैयार सामान बिक जाता है हाथों हाथ
मैक्रम से हैंगर बनाने की शुरुआत करने वाली विभा 30 महिलाओं को इसकी ट्रेनिंग भी दे रही हैं। वह धागे से सजावटी आइटम बनाने के अपने काम में लगातार प्रयोग कर रही हैं। इसी का नतीजा है कि अब उन्होंने बैंग, हैंगर, कार सीट कवर के साथ ही अन्य सजावटी सामान और ड्रेस भी बनाने शुरू कर दिए हैं।
मैक्रम के ड्रेस और लैपटॉप बैग की खूब डिमांड है। मैक्रम के धागे को लखनऊ और मुंबई से मंगाती हैं। उनके यहां तैयार सामान रांची, वाराणसी, कानपुर, लखनऊ, सिलचर (असम) तक जा रहा है। नोएडा की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी के अलावा दिल्ली, प्रयागराज और गोरखपुर की प्रदर्शनियों में भी स्टॉल लगाकर लोगों की तारीफ बटोर चुकी हैं।