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Gorakhpur News: प्राचार्य के निलंबन को मंजूरी, कार्य परिषद के मिनट्स में शामिल करने पर सवाल

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गोरखपुर। जेबी महाजन डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मधुप कुमार के निलंबन को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही विवाद भी खड़ा हो गया है। कार्य परिषद के तीन सदस्यों ने इस मामले को कार्य परिषद के मिनट्स में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई है।
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डीडीयू के कुलसचिव कार्यालय की ओर से शनिवार को जेबी महाजन डिग्री कॉलेज के प्रबंधक को पत्र लिखा गया। पत्र में बताया गया है कि कुलपति की ओर से छह मार्च को कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मधुप कुमार के निलंबन आदेश का अनुमोदन प्रदान कर दिया गया है। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को भी यह पत्र भेजा गया है।

यह आदेश जारी होने के बाद उदित नारायण पीजी कॉलेज की प्राचार्य प्रोे. ममता मणि त्रिपाठी की ओर से 25 फरवरी को कुलपति को लिखा पत्र भी वायरल होने लगा है। प्रो. ममता मणि के साथ ही उस पत्र में महात्मा गांधी पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अनिल सिंह और डीएवी पीजी कॉलेज की प्राचार्य प्रो. शैल पांडेय के भी दस्तखत हैं। ये तीनों प्राचार्य विश्वविद्यालय की सर्वोच्च इकाई कार्य परिषद के सदस्य भी हैं।
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पत्र में प्रो. ममता मणि ने कहा है कि आठ फरवरी को कार्य परिषद की बैठक हुई थी। बैठक में प्रो. ममता मणि ने प्रो. मधुप कुमार के प्रकरण को उठाया था। प्रो. अनिल सिंह व प्रो. शैल पांडेय ने भी जानना चाहा था, जिसके बाद कुलपति ने बताया था कि यह प्रकरण कार्य परिषद से संबद्ध नहीं है। इस मामले को कार्य परिषद के मिनट्स में बिंदु संख्या 34 (1) में दर्शाया गया है। पत्र में कहा गया है कि बैठक में कार्य परिषद के तीनों सदस्य उपस्थित थे। उसमें परीक्षा समिति की इस तरह की किसी संस्तुति को प्रस्तुत नहीं किया गया था। ऐसी स्थिति में इस प्रकरण को कार्य परिषद से स्वीकृत कैसे माना जाए? तीनों सदस्यों ने कार्य परिषद के मिनट में त्रुटि मानते हुए बिंदु 34 (1) प्रो. मधुप कुमार से जुड़े प्रकरण को हटाए जाने की मांग की है।



यह है मामला
16 दिसंबर 2025 को बीए पांचवें सेमेस्टर के अर्थशास्त्र (ईसीओ-301) और बीकॉम के कोड (सीओएम-302) की परीक्षा थी। जेबी महाजन डिग्री कॉलेज, चौरीचौरा में उसकी जगह कोड ईसीओ-302 और सीओएम-303 के प्रश्न पत्र बंट गए थे। ये दोनों परीक्षाएं 17 दिसंबर को होनी थीं। डीडीयू प्रशासन ने 17 दिसंबर की दोनों परीक्षाएं निरस्त कर दी थी। इसकी जांच के लिए गठित समिति ने तत्कालीन केंद्राध्यक्ष को जिम्मेदार माना था। दोनों पेपर को पुन: मुद्रित कराने पर 4,29,832 रुपये का खर्च आया था। केंद्राध्यक्ष से ही इसकी रिकवरी का आदेश जारी किया गया था। इस मामले में नौ फरवरी को कॉलेज के प्रबंधक ईश्वर चंद जायसवाल ने प्राचार्य प्रो. मधुप कुमार को निलंबित कर दिया था।
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