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तीन फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी गिरफ्तार, बैंक कर्मियों की मिली भगत से लेते थे गोपनीय सूचना

Wed, 24 Feb 2021 12:30 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती
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फाइल फोटो - फोटो : social media
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उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बनकर बैंक की गोपनीय जानकारी लेकर लोगों के खाते से गाढ़ी कमाई ट्रांसफर कर लेने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। अंतर्जनपदीय गिरोह के तीन सदस्यों को साइबर सेल, सर्विलान्स सेल व स्वाट टीम की मदद से कोतवाली पुलिस ने मंगलवार सुबह टोल प्लाजा के पास से गिरफ्तार किया। 
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तीनों के कब्जे से दो लाख अस्सी हजार रुपये नकद के अलावा पांच मोबाइल फोन, आधार कार्ड, एप्पल वाच आदि बरामद की है। एसपी हेमराज मीणा ने प्रेसवार्ता में बताया कि इस गैंग ने विगत दो वर्षों में लगभग 5 करोड़ 10 लाख रुपये ऑनलाइन ठगी की है। अपराध से अर्जित संपत्ति पता कर उनकी जब्तीकरण की कार्रवाई गैंगेस्टर एक्ट के अन्तर्गत की जाएगी।

गिरफ्तार अभियुक्तों में रोशन निवासी जैन कालोनी मोहन गार्डेन थाना बिन्दापुर पश्चिमी दिल्ली, मूल पता ग्राम देवीपुर थाना पनियरा जनपद महराजगंज, राहुल कुमार सिंह निवासी शक्ति खण्ड-2, इन्द्रापुरम, थाना इन्द्रापुरम, जनपद गाजियाबाद मूल पता ग्राम भीखपुर थाना आन्दर, जिला- सिवान, बिहार और अनमोल शर्मा उर्फ अन्नू निवासी नीति खण्ड-2, प्रथम तल थाना इन्द्रापुरम जनपद गाजियाबाद शामिल हैं। 
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बताया कि कोतवाली थाने में आठ मार्च 2020 को हरविंदर सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें बताया गया कि छह मार्च को उसके मोबाइल पर फोन आया। बोलने वाले ने खुद को एसबीआई क्रेडिट कार्ड कस्टमर केयर अधिकारी बताया। उसने अपनी बातों में फंसा कर एसबीआई क्रेडिट कार्ड से संबंधित गोपनीय जानकारी प्राप्त कर क्रेडिट कार्ड से एक लाख 10 हजार रुपये किसी अन्य खाते में आनलाइन ट्रांजेक्शन कर निकाल लिया। मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश की गई तो तीनों गिरफ्त में आ गए।
 
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बैंक कर्मी बताते थे गोपनीय जानकारी

अभियुक्तों ने बताया कि इनके गिरोह में बैंक के कर्मचारी शामिल हैं। जो नए क्रेडिट व डेबिट कार्ड जारी कराने वाले खातेदारों का मोबाइल नंबर और अन्य जरूरी जानकारी साइबर अपराधियों को मुहैया कराते थे। इसके बाद गिरोह के गुर्गे फर्जी कस्टमर केयर अधिकारी बताकर खातेदार की मोबाइल पर टेली कालिंग करते थे। नया कार्ड धारक समझता है कि बैंक से ही कॉल आई होगी। इसलिए वह अपना पिन नंबर और कार्ड संख्या बता देता था। जिसके बाद साइबर अपराधी खाते से रकम उड़ा देते थे।
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