कर्महीन ज्ञान का कोई लाभ नहीं, आमजन के जीवन को बेहतर करने वाला ज्ञान जरूरी
एमएमएमयूटी के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने बताईं तकनीक की उपयोगिता
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने कहा कि आज का समय प्रौद्योगिकी और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का है। जो राष्ट्र निरंतर नया शोध करेंगे तथा नई तकनीक विकसित करेंगे, वहीं दुनिया का नेतृत्व करेंगे। हम विकास के एक ऐसे बिंदु पर आ पहुंचे हैं, जहां बहुत सारी समस्याओं का समाधान तकनीक से ही संभव है। प्रधानमंत्री के मंशानुसार भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है। इसके लिए हमें प्रौद्योगिकी की दिशा में तेजी से कार्य करना होगा।
राज्यपाल ने बृहस्पतिवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए विद्यार्थियों को तकनीक की उपयोगिता बताईं। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से ही हम गरीबी, अशिक्षा को खत्म कर देश को सुखी एवं समृद्ध बना पाएंगे। हमें छात्रों को भविष्य के लिए प्रशिक्षित करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि ज्ञान सर्वाेच्च शक्ति है, परंतु कर्महीन ज्ञान का कोई लाभ नहीं है। वह ज्ञान संचित करने से कोई लाभ नहीं, यदि उससे कोई नवाचार न हो रहा हो एवं उससे समुदाय, राष्ट्र या मनुष्यता का कोई भला न हो रहा हो। ज्ञान की सार्थकता इसी में है कि वह आमजन के जीवन को और अच्छा करने में सहायक हो। मेरा मत है कि अध्ययन-अध्यापन के अतिरिक्त प्रत्येक विश्वविद्यालय की एक महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका होती है। विश्वविद्यालयों को ज्ञान के पृथक, एकाकी केन्द्रों के रूप में विकसित नहीं होना चाहिए। बल्कि उन्हें आगे बढ़कर अपने आसपास के समाज एवं समुदाय के सर्वांगीण विकास में सक्रिय, सकारात्मक सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा सोशल इंटर्नशिप को स्नातक पाठ्यक्रम का अनिवार्य अंग बनाया गया है। यह प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय पहल है तथा अपेक्षा करती हूं कि अन्य संस्थान भी ऐसी पहल करेंगे। छात्रों में सामाजिक दायित्व बोध विकसित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिशा में अनिवार्य सोशल इंटर्नशिप एक सार्थक प्रयास होगा।
पूरब में उच्च शिक्षा में बेहतर नहीं हो सकती, भ्रम टूटा
राज्यपाल ने कहा कि पहले यह भ्रांति थी कि पश्चिम की तरह पूरब में उच्च शिक्षा बेहतर नहीं हो सकती। इसके चलते यहां की यूनिवर्सिटी रैंकिंग के लिए प्रयास नहीं करती थीं, लेकिन अब यह भ्रांति टूट गई है। एमएमएमयूटी ने एनआईआरएफ रैंकिंग में अच्छा प्रदर्शन किया है। इस यूनिवर्सिटी ने देश भर के 8000 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 84वां स्थान प्राप्त किया है, जबकि देश के 1116 विश्वविद्यालयों में 94 और 10585 राज्य विश्वविद्यालयों में 40वां स्थान प्राप्त किया है। इसके लिए यूनिवर्सिटी के शिक्षक बधाई के पात्र हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले साल रैंकिंग में और बेहतर प्रदर्शन यूनिवर्सिटी करेगी।
दो महीने में समर्थ पोर्टल लागू करने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय
कुलाधिपति ने कहा कि एमएमएमयूटी समर्थ पोर्टल के आयाम को केवल दो महीने में ही पूरा करके दिखाने वाला प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय बना है। इससे कार्य में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा कि इस यूनिवर्सिटी ने तकनीक का सहारा लेकर डीजीलॉकर लांच किया है। अब विदेशों में रहने वाले छात्रों को उपाधि या अंकतालिका के लिए यहां का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। अब वह विश्व में कहीं से भी डीजीलाॅकर से अपनी उपाधि प्राप्त कर सकते हैं।
आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर
कुलाधिपति ने कहा कि आज जिस तरह से रोग बढ़ रहे हैं, इसको लेकर स्वास्थ्य के प्रति भी सचेत रहने की जरूरत है। गलत खान-पान से रोग बढ़ने का मुख्य कारण सामने आया है। इसमें कमी लाने के लिए आर्गेनिक खेती की तरफ बढ़ना होगा।
चार करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का है लक्ष्य
राज्यपाल ने कहा कि आज हर गांव में महिला स्वयं सहायता समूह संचालित हैं। पहले महिलाओं को घर से बाहर निकलने नहीं देते थे, आज वहीं 10-10 महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। महिलाएं आगे आ रही हैं कि देश के लिए कुछ करना है। प्रधानमंत्री ने चार करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है।
वर्ल्ड रैंकिंग में शामिल होने का दिया लक्ष्य
कुलाधिपति ने कहा कि आज प्रदेश की छह यूनिवर्सिटी ए++ और चार यूनिवर्सिटी ए+ और एक यूनिवर्सिटी (एमएमएमयूटी) ने ए+ ग्रेड हासिल किया है। इसके साथ ही उन्होंने अब वर्ल्ड रैंकिंग के लिए प्रतिभाग करने का लक्ष्य निर्धारित करने को कहा। कुलाधिपति ने कहा कि पीएम उषा योजना के तहत पांच यूनिवर्सिटी को 100-100 करोड़ रुपये मिले हैं। यूपी में सबसे ज्यादा 760 करोड़ रुपये दिए गए हैं। अब वर्ल्ड रैंकिंग में आने का लक्ष्य है। हम इसे तय करें तो जरूर प्राप्त कर सकते हैं।