पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी, ग्रामीण क्षेत्र में जाकर महिलाओं को टारगेट करते थे। उन्हें ये सरकार की योजनाओं के बारे में बताते थे और झांसा देते थे कि खाता खुलवा लिया तो उनको भी इन योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके लिए उन्हें एक भी रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
खोराबार थाना पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े एक गिरोह के चार गुर्गों को पकड़ा है। सभी ग्रामीण महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर खाते खुलवाते थे। बाद में उसका इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाते थे। रुपये को वे यूएसडीटी और बाद में क्रिप्टो करेंसी में बदल देते थे। बताया जा रहा है कि ये रुपये क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेशों में भेजे जाते थे।
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गोरखपुर में अब तक पुलिस को 16 खाते मिले हैं जिसके माध्यम से करीब 98 लाख रुपये ठिकाने लगाए गए हैं। पकड़े गए आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गीडा थाना क्षेत्र के नौसड़ निवासी वंश निषाद, रामगढ़ताल इलाके के तारामंडल निवासी शोभित गौड़, एम्स थाना क्षेत्र के महादेव झारखंडी निवासी शक्ति जायसवाल और एम्स इलाके के आवास विकास कॉलोनी निवासी शिवम पटवा के रूप में हुई।
पुलिस के मुताबिक, इन आरोपियों को शनिवार को खोराबार क्षेत्र से पकड़ा गया। इनके पास से 10 मोबाइल फोन, दो सिम कार्ड, एक बैंक पासबुक, एक एटीएम कार्ड और एटीएम की तीन पर्चियां मिली हैं।
पुलिस के अनुसार, ये सभी आरोपी साइबर ठगी के गिरोह से जुड़े हुए हैं। इसमें इनका मुख्य काम खाता खुलवाकर उसकी मदद से रुपये को ठिकाने लगाना था। हर खाते और ट्रांजेक्शन के पीछे इन्हें कमीशन मिलता था। सभी आरोपी कॉलेज पासआउट या स्नातक की पढ़ाई करने वाले हैं। यहां पर वंश ही इन्हें लीड करता था।
आधार कार्ड लेकर निकलवाते थे सिम
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी, ग्रामीण क्षेत्र में जाकर महिलाओं को टारगेट करते थे। उन्हें ये सरकार की योजनाओं के बारे में बताते थे और झांसा देते थे कि खाता खुलवा लिया तो उनको भी इन योजनाओं का लाभ मिलेगा। इसके लिए उन्हें एक भी रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसके बाद वह उनसे आधार और पैन कार्ड लेकर रख लेते थे। आधार कार्ड की मदद से सबसे पहले सिम कार्ड निकलवाते थे। इसके बाद बैंक में खाता खुलवाकर पासबुक और एटीएम कार्ड भी रख लेते थे।
इस तरह पकड़ में आया मामला
खोराबार थाना क्षेत्र के मदरहवा गांव निवासी रेनू की शिकायत के बाद यह मामला पकड़ा गया है। 12 मार्च को पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। रेनू ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि शक्ति और शिवम पटवा ने उसे गरीब कल्याणकारी योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता और सिलाई मशीन दिलाने का आश्वासन दिया था।
इसी बहाने उन्होंने बैंक में खाता खुलवाने के लिए उसका आधार कार्ड और पैन कार्ड ले लिया। आरोप है कि दोनों युवकों ने उसके दस्तावेजों के आधार पर इंडियन बैंक में खाता खुलवाया और आधार कार्ड से एक मोबाइल सिम भी निकलवा लिया। खाता खुलने के बाद पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड अपने पास ही रख लिया।
जब रेनू ने योजनाओं का लाभ मिलने के बारे में पूछा तो आरोपियों ने बताया कि उन्होंने खाते से संबंधित दस्तावेज अपने एक साथी वंश निषाद को दे दिए हैं और जल्द ही योजना का लाभ मिल जाएगा। कुछ समय बाद जब रेनू बैंक पहुंची और खाते की जानकारी ली तो पता चला कि उसके खाते से लाखों रुपये का लेनदेन हो चुका है। जबकि उसने खाते में कोई पैसा जमा किया और न ही कोई निकासी की थी। इसके बाद उसे धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
पकड़े न जाएं इसलिए एक खाते का एक ही बार करते थे इस्तेमाल
साइबर ठगी के बाद पकड़ में न आने पाएं, इसके लिए आरोपी एक खाते का इस्तेमाल एक ही बार करते थे। उसमें से रुपये निकालने के बाद वह एटीएम कार्ड और सिम कार्ड को तोड़ देते थे। पकड़े गए सभी आरोपी तकनीकी रूप से सक्षम थे। पुलिस की जांच में सामने आया है कि जालसाजी की शिकायत करने वाली रेनू के खाते से करीब 12 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था।
पुलिस की जांच में पता चला है कि साइबर ठगी के बाद जालसाज उस रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर देते हैं ताकि पुलिस उन्हें जल्द ट्रेस न कर सके। इसे म्यूल खाता कहा जाता है। गोरखपुर में मिले खातों को भी आरोपी म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल करते थे। खाते में रुपये आने के बाद उसे एटीएम के माध्यम से निकाल लेते थे। इसके बाद इसे यूएसडीटी फिर क्रिप्टो करेंसी में बदल देते थे। इससे यह पैसा आसानी से देश के बाहर चला जाता था।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह की एक पूरी नेटवर्क चेन है जिसमें अलग-अलग जगहों पर बैठे जालसाज वारदात को अंजाम देने से लेकर रुपये ठिकाने लगाने का काम करते हैं। आरोपियों के पास मिले मोबाइल फोन और दस्तावेज की मदद से पुलिस अब इस नेटवर्क की जांच कर रही है।
महिला की शिकायत के बाद जांच कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस गिरोह में और भी लोग शामिल हैं, जिनकी तलाश जारी है। जल्द ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा: अरुण कुमार, सीओ कैंट