घायल बच्चों का जिला अस्पताल में इलाज करते डॉक्टर।
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गोरपुर में रामपुर के कंपोजिट विद्यालय में हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई थी। गांव में बात आग की तरह फैली और फिर वहां भीड़ जुट गई। जिसके बच्चे स्कूल गए थे, वह जिस हाल में था, उसी हाल में दौड़ पड़ा। इन सब के बीच हादसे के बाद प्रधान खुद के बचाव में बच्चों को लेकर दौड़ने लगे थे।
कम घायल बच्चों को गाड़ियों से अस्पताल पहुंचाए तो गंभीर घायलों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल भेजा गया। उधर, हादसे के बाद ग्रामीण यही दुआ करते रहे कि बच्चों की जान को कुछ न हो, किसी तरह उनकी जान बच जाए।
हादसे के बाद बुधवार की शाम डीएम कृष्णा करुणेश व एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। अफसरों ने परिजनों से मुलाकात करने के साथ ही डॉक्टरों से भी बातचीत की। इलाज में लापरवाही न होने की हिदायत देने के साथ ही सिर में चोट से घायल बच्चे की सेहत में सुधार होने पर तत्काल जानकारी देने को कहा गया।
गांव में हादसे के बाद तरह-तरह की चर्चा है। कोई प्रधान को कोस रहा है तो कोई उनके बेटे को जिसने गाड़ी में चाबी छोड़ दी थी। इन सब के बीच अध्यापकों पर भी गुस्सा है कि क्लास के बाहर बच्चों को लाकर क्यों पढ़ाया जा रहा था। अध्यापक धूप की वजह से बाहर पढ़ाने की बात कह रहे हैं, लेकिन नियमानुसार गलत है।
बेतुका तर्क...धूप के चक्कर में मैदान में थे बच्चे, अब करेंगे जांच
प्राथमिक विद्यालय में क्लास रूम बने हैं, सारी व्यवस्थाएं हैं। सुरक्षा के इंतजाम हैं, ताकि बच्चों के साथ कोई हादसा न होने पाए। लेकिन रामपुर कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय में बुधवार को हादसे के बाद यह सारी व्यवस्था की हकीकत भी सामने आ गई। बच्चों को मैदान में बैठाकर पढ़ाया जा रहा था। परिसर में कार आ गई थी। संयोग अच्छा था कि किसी बच्चे की जिंदगी नहीं गई, लेकिन परिसर में कार आना और बच्चों का बाहर होना अपने आप में एक बड़ी चूक है। अब मामला सामने आने के बाद बीएसए रमेंद्र कुमार सिंह ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। बीएसए का कहना है कि मामला गंभीर है। प्रकरण की जांच के लिए खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया गया है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।