गोरखपुर। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल रामगढ़ताल को प्रदूषण से मुक्त और अधिक स्वच्छ बनाने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने अब फाइटोरेमेडिएशन (प्राकृतिक विधि) तकनीक अपनाने का निर्णय लिया है। इस परियोजना पर लगभग दो करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। सोमवार को निरीक्षण के दौरान जीडीए के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने मुख्य अभियंता किशन सिंह को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के निर्देश दिए।
योजना के तहत बुद्धा गेट के पास ताल में गिरने वाले नगर निगम के पांच बड़े नालों का प्राकृतिक तरीके से शोधन किया जाएगा, जिससे बिना रासायनिक प्रक्रिया के ही गंदे पानी को साफ किया जा सके। मानसून के दौरान इन नालों से ओवरफ्लो होकर सीधे ताल में पहुंचने वाला दूषित जल जल गुणवत्ता और जैव विविधता को प्रभावित करता है। इसके अलावा पंपिंग स्टेशन और रिंग रोड के पास प्रभावित हिस्सों में ड्रेजिंग कर सिल्ट की निकासी भी की जाएगी। उपाध्यक्ष ने कहा कि इस पहल से न केवल ताल का पानी स्वच्छ होगा बल्कि जलीय जीवों और जैव विविधता को भी संरक्षण मिलेगा। साथ ही ताल की सुंदरता और पर्यावरणीय रैंकिंग में सुधार होगा तथा यह कम लागत में दीर्घकालिक समाधान साबित होगा।
निरीक्षण के दौरान पैडलेगंज से स्मार्टव्हील मोहद्दीपुर तक निर्माणाधीन रिटेनिंग वॉल को शीघ्र पूर्ण करने, सफाई व्यवस्था सुधारने और सड़क पर फैली मिट्टी हटाने के निर्देश दिए गए। ईवी चार्जिंग स्टेशन के पास इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने और क्षतिग्रस्त फुटपाथों की मरम्मत का भी आदेश दिया गया। इसके अलावा रेनवॉटर पाइपों की सफाई, स्टोन पिचिंग का समतलीकरण और रेलिंग के पीछे ग्रीन नेट लगाने के निर्देश दिए गए। फ्लोटिंग ट्रैश बैरियर को और मजबूत करने तथा उसके माध्यम से फ्लोटिंग वेटलैंड विकसित करने पर भी जोर दिया गया। निरीक्षण में जीडीए के कई वरिष्ठ अभियंता एवं अधिकारी उपस्थित रहे और चल रहे विकास एवं सुंदरीकरण कार्यों की समीक्षा की गई।