एम्स के प्रशासनिक अफसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली छात्रा के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, छात्रा के बारे में भी काफी आश्चर्यजनक तथ्य सामने निकल कर आ रहे हैं, जिससे सारा मामला काफी पेचीदा लग रहा है। पता चला है कि पीड़ित छात्रा दो बार नींद की दवा का ओवरडोज ले चुकी है, जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ गई थी।
छात्रा ने पहली बार 17 दिसंबर को नींद की कई गोलियां निगल ली थीं। तबीयत बिगड़ी तो उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार होने पर अगले दिन यानी 18 दिसंबर को वह एक सहेली के साथ आरोपी अफसर के दफ्तर पहुंची। वह उनके केबिन में करीब एक घंटे 10 मिनट तक रही। इस दौरान उसकी सहेली केबिन के बाहर रही। घर जाने के कुछ देर बाद फिर छात्रा अपने भाई के साथ आई और लगभग 10 मिनट तक केबिन में रही।
छात्रा का आरोप है कि उसे शरीर और दिमाग फिट रखने वाली एक किताब देने के बहाने आरोपी अफसर ने अपने कार्यालय बुलाया था। इस बार अफसर ने उसके साथ मनमानी का प्रयास किया। जिसके बाद वह कमरे से निकलकर बाहर आ गई। हालांकि इसके बाद आरोपी अफसर उसे एयरपोर्ट तक छोड़ने गए थे। सात जनवरी को छात्रा फिर गोरखपुर लौटी और उसने नींद की दवा का ओवरडोज ले लिया। सवाल यह है कि आखिर ऐसी क्या बात है, जिसके चलते वह बार-बार नींद की गोलियों की ओवरडोज ले रही है। मामले की जांच कर रही विशाखा कमेटी इस सवाल का जवाब भी खोजने में लगी है।
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सात जनवरी को छात्रा ने जब गोलियां निगल लीं तो उसे पहले एम्स के ही मेडिसिन विभाग और फिर मनोचिकित्सा विभाग में भर्ती कराया गया। आठ जनवरी को महिला काउंसलर के साथ हुई करीब एक घंटे की वार्ता में छात्रा ने यौन उत्पीड़न का खुलासा किया। इसके बाद पूरे प्रकरण की जानकारी एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पॉल को दी गई। अगले ही दिन कार्यकारी निदेशक पटना से रात में 10 बजे गोरखपुर पहुंचे और सीधे छात्रा से जाकर मिले। वहां आधे घंटे तक वार्ता के बाद छात्रा को उन्होंने प्रकरण के निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।