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Gorakhpur News: प्रदेश की सबसे उम्रदराज शेरनी स्वस्थ होने की कर रही जद्दोजहद, 21 की हो चुकी मरियम

Wed, 17 Jan 2024 10:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

चिड़ियाघर में बब्बर शेर मंगलवार को अकेला बाड़े के लिए किनारे बैठा दिखा। अक्सर दोनों में एक-एक कर पटौदी और मरियम को बाहर निकाला जाता था। लेकिन, मंगलवार को पटौदी अकेला बाड़े के मचान के नीचे बैठा दिखा।
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शेरनी मरियम की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में रह रही 21 साल की शेरनी मरियम गंभीर रूप से बीमार है। चिड़ियाघर प्रबंधन इसके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। सामान्य दिनों में 10 से 12 किलो मांस खाने वाली मरियम इस समय पांच से सात किलो तक ही मांस खा रही है। उसके स्वस्थ्य की जानकारी चिड़ियाघर प्रशासन ने शासन और राज्य चिड़ियाघर प्राधिकरण को भी दे दी है। मालूम हो कि मरियम प्रदेश के सभी चिड़ियाघरों में रहनेवाली शेरनियों में सबसे उम्रदराज है।

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चिड़ियाघर के पशु चिकित्सक डा. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि मारियम अपनी उम्र पूरी कर चुकी है। एक शेरनी की उम्र अधिकतम 18 वर्ष होती है, जबकि वह 21 वर्ष की हो चुकी है। कमजोर होने की वजह से उसका भोजन भी नहीं के बराबर हो गया है। जबड़े में ताकत न होने के कारण उसे मांस खाने में दिक्कत हो रही है।

शरीर के अंदरुनी हिस्से कमजोर होने की वजह से अस्वस्थ होते जा रहे हैं। ऐसे में भोजन को पचाने में मरियम को काफी दिक्कत हो रही है। बीमारी में सबसे खास कारण यही है। इसी वजह से उसे मुलायम खाद्य पदार्थ दिया जा रहा है। किसी तरह का तनाव न होने देने के लिए उसका इलाज बाड़े में रखकर कर रहे हैं। उसे दर्शकों की पहुंच से दूर कर दिया गया है।
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अस्पताल में नहीं मिलेगी खुली हवा
डॉ. सिंह का कहना है कि यदि इलाज के लिए उसे अस्पताल में रखा जाएगा तो खुली हवा नहीं मिल पाएगी और उसका असर भी स्वास्थ्य पर पड़ेगा। डा. सिंह ने बताया कि मरियम जब इटावा सफारी से लाई गई थी, तभी वह उम्र पूरी कर चुकी थी। अतिरिक्त सावधानी बरतने की वजह से वह आज भी चिड़ियाघर का हिस्सा है।

बाड़े में तन्हा दिखा पटौदी
चिड़ियाघर में बब्बर शेर मंगलवार को अकेला बाड़े के लिए किनारे बैठा दिखा। अक्सर दोनों में एक-एक कर पटौदी और मरियम को बाहर निकाला जाता था। लेकिन, मंगलवार को पटौदी अकेला बाड़े के मचान के नीचे बैठा दिखा।

ये होता है जंगल और चिड़ियाघर में अंतर
पशु चिकित्साधिकारी डॉ योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि जंगल में भोजन एक सबसे बड़ा कारण होता है। शिकार के बाद ही जंगल में शेर को भोजन मिलता है। जरूरी नहीं कि रोजाना उन्हें शिकार मिल जाए। इसके अलाव घूमते-घूमते पर्यावरणीय संतुलन और भोजन में भिन्नता शारीरिक रूप से अस्वस्थ कर देती। लेकिन चिड़ियाघर में उच्च क्वालिटी का नियमित भोजन, पर्यावरण के अनुसार खान-पान, समय-समय पर उपचार और दवाओं से इन्हें स्वस्थ रखा जाता है। ऐसे में इनकी उम्र अधिक हो जाती है।
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