अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मदन मोहन मालवीय टीचर ट्रेनिंग सेंटर में शुक्रवार को 11वां गुरुदीक्षा कार्यक्रम हुआ। इसमें प्रो. शरद मिश्रा ने कहा कि एक आदर्श शिक्षक की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह ज्ञान के सृजनकर्ता, प्रसारक और संस्थान के विकास में भागीदार होते हैं। उन्होंने कहा कि शोध, शिक्षण और सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों में सक्रिय योगदान एक शिक्षक की मूल जिम्मेदारियां हैं।
प्रो. मिश्रा शुक्रवार को एक सत्र के दौरान संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि निरंतर व्यावसायिक विकास (सीपीडी) शिक्षक को नए विचारों, शिक्षण सिद्धांतों और नेतृत्व कौशल से समृद्ध करता है, जिससे कक्षा में प्रभावशीलता और छात्रों के सीखने के परिणाम बेहतर होते हैं। उनके अनुसार सेमिनार, ऑनलाइन कोर्स, शोध और विभागीय गतिविधियां शिक्षक की क्षमताओं को निखारती हैं और संस्थान की गुणवत्ता में भी सुधार लाती हैं। कार्यक्रम में प्रो. एसके सिंह ने क्लाउडबर्स्ट व ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड जैसी आपदाओं पर व्याख्यान दिया। संचालन प्रो. राकेश तिवारी ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. केएम मिश्रा ने किया।