गोरखपुर। पश्चिमी एशिया में संघर्ष का असर अब स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है। कतर पर हमले से भारत में हीलियम गैस की आपूर्ति ठप हो गई है। इसके चलते एमआरआई जांच में इस्तेमाल होने वाली हीलियम की कीमत कुछ ही समय में लगभग दोगुनी हो गई है, जिससे निजी एमआरआई सेंटर दाम बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
बता दें कि, अभी निजी सेंटर मरीजों से एक एमआरआई कराने पर पांच हजार रुपये लेते हैं। शहर में करीब 15 एमआरआई सेंटर संचालित हैं, जिनमें कई स्थानों पर पुरानी मशीनें लगी हैं और उनमें हीलियम गैस की खपत अधिक होती है। इससे आने वाले समय में जांच की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है।
निजी एमआरआई सेंटर संचालक विशाल ने बताया कि पहले जितनी तरल हीलियम गैस करीब आठ लाख रुपये में मिलती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर लगभग 15.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है। एक बार गैस भरवाने पर पुरानी मशीनों में यह लगभग दो से तीन महीने तक चलती है, जबकि नई मशीनों में एक बार गैस भरने के बाद तीन साल तक आवश्यकता नहीं पड़ती।
उन्होंने बताया कि हीलियम गैस गुजरात से आती है। तरल हीलियम एमआरआई मशीन के चुंबक को अत्यधिक ठंडा बनाए रखती है। इसी से चुंबक सुपर कंडक्टिंग अवस्था में रहता है, जिससे बिना प्रतिरोध के बिजली प्रवाहित होती है और शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र तैयार होता है। यही प्रक्रिया शरीर के अंदर की स्पष्ट इमेज तैयार करने में मदद करती है।
इधर, चांदी की कीमतों में उछाल से एमआरआई फिल्म भी महंगी हो गई है। पहले 100 फिल्मों का पैकेट करीब 11 हजार रुपये में मिलता था, जो अब बढ़कर लगभग 25 हजार रुपये तक पहुंच गया है। इससे जांच की कुल लागत और बढ़ने लगी है।