ट्रेन से मुंबई जा रहे पश्चिम बंगाल के दंपती को रेलवे स्टेशन से किया था अगवा
निलंबन के बाद विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई के संकेत
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पश्चिम बंगाल के दंपती को अगवा कर लूट की कोशिश के आरोपी सिपाही अभिषेक यादव को विभागीय जांच में दोषी पाया गया है। अब विभाग ने उसके खिलाफ बर्खास्तगी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आरोपी सिपाही मूलरूप से गाजीपुर जिले के चौरा मनिहारी गांव का रहने वाला है। घटना के समय वह पुलिस लाइंस में तैनात था। फिलहाल आरोपी जेल में है।
मामला बीते 3 फरवरी का है। पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के सुलवा गेट निवासी सौरभ विश्वास अपनी पत्नी के साथ बिहार के नरकटियागंज में मजदूरी करते थे। काम के सिलसिले में दोनों ट्रेन से मुंबई जाने के लिए रात में बस से गोरखपुर पहुंचे थे। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर नौ पर खड़ी ट्रेन में चढ़ते समय सिपाही अभिषेक यादव ने उन पर मोबाइल चोरी का आरोप लगाते हुए जबरन ट्रेन से उतार लिया।
आरोप है कि सिपाही दोनों को पूछताछ के बहाने अपनी बाइक पर बैठाकर गोरखनाथ थाने की ओर ले गया। थाने के गेट पर पहुंचने के बाद उसने सौरभ विश्वास को उतार दिया और उसकी पत्नी को महिला थाने ले जाने की बात कहकर अपने साथ ले गया। काफी देर तक पत्नी के न लौटने पर सौरभ ने गोरखनाथ थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस महिला की तलाश में जुट गई।
आरोपी सिपाही महिला को स्पोर्ट्स कॉलेज के पास ले गया, जहां उसने उसके गहने लूटने की कोशिश की। महिला के विरोध पर उसके साथ मारपीट की। शोर मचाने पर आरोपी महिला को वहीं छोड़कर भाग गया। उधर, पुलिस की खोजबीन में करीब आधे घंटे के भीतर महिला, स्पोर्ट्स कॉलेज के पास से मिल गई।
घटना के बाद पीड़ित सौरभ विश्वास की तहरीर पर गोरखनाथ थाना पुलिस ने आरोपी सिपाही के खिलाफ जानलेवा हमला, फर्जी दस्तावेज तैयार कर जालसाजी समेत गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। तत्कालीन एसएसपी गौरव ग्रोवर ने सिपाही को निलंबित कर विभागीय जांच बैठा दी थी।
सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस की मदद से पुलिस ने आरोपी की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया था। अब विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अब उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त करने की तैयारी की जा रही है।
वर्जन
विभागीय जांच में सिपाही दोषी पाया गया है। उसके खिलाफ नियमानुसार बर्खास्तगी की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पुलिस की छवि को धूमिल करने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
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पहले भी कई बार लग चुके हैं वर्दी पर दाग
5 अगस्त 2025 : राजस्थान से आए युवक से लूटपाट के मामले में नौसड़ चौकी इंचार्ज शुभम श्रीवास्तव, दरोगा अर्चना राणा, सिपाही प्रवीण यादव समेत चार पुलिस कर्मी निलंबित।
22 नवंबर 2024 : पिपराइच थाने में तैनात प्रशिक्षु महिला दारोगा अंकिता पांडेय 10 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार
31 जुलाई 2024 : खोराबार पुलिस चौकी के दो सिपाहियों को एंटी करप्शन की टीम ने 10 हजार रुपये घूस लेते पकड़ा।
10 जून 2024 : एम्स थाने की जगदीशपुर चौकी पर तैनात दारोगा व सिपाहियों पर भ्रष्टाचार की प्राथमिकी दर्ज हुई।
01 अप्रैल 2024 : बेनीगंज चौकी प्रभारी आलोक सिंह पर व्यापारी के 50 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगा। पुलिस ने साथी संग गिरफ्तार कर जेल भिजवाया।
06 फरवरी 2024 : खोराबार थाने के रामनगर कड़जहां के पूर्व चौकी प्रभारी समेत चार पर भ्रष्टाचार की प्राथमिकी दर्ज हुई। एक युवक से 10 हजार रुपये मांग रहे थे।
17 जनवरी 2024 : पीपीगंज थाने में तैनात दरोगा अमित कुमार सिंह और सिपाही अमित यादव को एसएसपी ने निलंबित किया। आरोप था कि तस्कर को छोड़ने के लिए रुपये लिए थे।
11 अक्तूबर, 2023 : शाहपुर पुलिस ने सम्मन सेल में तैनात दरोगा रविंद्र शुक्ल व उसके साथी कुलवीर को 33 किलो गांजे के साथ पकड़ा।