गोरखपुर। औद्योगिक क्षेत्र में अपशिष्ट जल के निस्तारण की समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रस्तावित कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) परियोजना को शासन की आपत्तियों के बाद नए सिरे से तैयार किया गया है। नई योजना के तहत अब एक बड़े प्लांट के बजाय दो अलग-अलग सीईटीपी प्लांट स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक प्लांट की क्षमता दो एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) होगी। इस प्रकार कुल क्षमता चार एमएलडी ही रहेगी लेकिन इसे दो इकाइयों में विभाजित किया गया है।
पहले गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की ओर से एक ही स्थान पर चार एमएलडी क्षमता का एक बड़ा प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। इस परियोजना के लिए 198 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, जिसमें निर्माण के साथ-साथ अगले 15 वर्षों के संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) का खर्च भी शामिल था। हालांकि, शासन ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए विस्तृत ब्योरा मांगा था।
शासन की आपत्ति के बाद गीडा प्रशासन ने परियोजना की लागत और संरचना पर पुनर्विचार किया। संशोधित प्रस्ताव में परियोजना की लागत घटाकर 98 करोड़ रुपये कर दी गई है। इसमें निर्माण कार्य पर विशेष ध्यान दिया गया है, जबकि ओएंडएम को अलग से व्यवस्थित करने की योजना बनाई गई है। गीडा ने यह नया प्रस्ताव दोबारा शासन को स्वीकृति के लिए भेज दिया है।
अधिकारियों का मानना है कि दो अलग-अलग प्लांट स्थापित करने से संचालन में अधिक लचीलापन मिलेगा। यदि किसी एक प्लांट में तकनीकी समस्या आती है, तो दूसरी इकाई के माध्यम से काम प्रभावित हुए बिना जारी रखा जा सकेगा। इसके अलावा औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का प्रबंधन भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
गीडा की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अनुज मलिक ने बताया कि शासन की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए परियोजना में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि नई योजना में लागत को युक्तिसंगत बनाया गया है और तकनीकी पहलुओं को भी बेहतर तरीके से शामिल किया गया है।