कोतवाली थाने की बेनीगंज पुलिस चौकी। उद्घाटन के समय की फोटो, आलोक सिंह इसी चौकी में प्रभारी था।
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शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में स्थित बेनीगंज में अप्रैल 2024 में चेकिंग के दौरान दवा व्यापारी नवीन श्रीवास्तव को धमकाकर 50 लाख रुपये हड़पने का सनसनीखेज केस पैरवी के अभाव में कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। बीते 10 जून को पीड़ित नवीन की कैंसर से मौत हो गई और मामले के गवाह नवीन के भाई गगन लकवाग्रस्त हो चुके हैं।
इस बीच दो आरोपियों को हाईकोर्ट से प्रोसीडिंग स्टे मिल गया है। हालांकि, आरोपी चौकी इंचार्ज आलोक सिंह और प्रिंस श्रीवास्तव अभी जेल में है। तीन अप्रैल 2024 को बलिया निवासी बेनीगंज के तत्कालीन चौकी इंचार्ज आलोक सिंह ने चेकिंग के दौरान लाला टोली निवासी दवा व्यापारी नवीन श्रीवास्तव को 50 लाख रुपये के साथ पकड़ा था।
आरोप है कि एनकाउंटर का डर दिखाकर पूरी रकम हड़प ली थी। मामला संज्ञान में आने पर तत्कालीन एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बेनीगंज चौकी प्रभारी आलोक सिंह को सस्पेंड कर दिया था। तत्कालीन एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने मामले की जांच शुरू की जिसके बाद नवीन की तहरीर पर कोतवाली थाने में चौकी इंचार्ज आलोक सिंह और उसके साथी प्रिंस श्रीवास्तव व तीन अज्ञात के खिलाफ भ्रष्टाचार सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ।
बाद में आलोक और प्रिंस जेल भेज दिए गए। जांच के दौरान मुकेश, प्रचंड और विशाल के नाम भी सामने आए थे। इन तीनों ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर मामले में रियायत हासिल कर ली थी। बाद में इनमें से दो को प्रोसीडिंग स्टे मिल गया। जेल में बंद दरोगा आलोक सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर रखी है। इसी बीच पीड़ित नवीन की कैंसर की चपेट में आ गया।
अमर उजाला से बातचीत में भाई गगन ने बताया कि 10 जून को नवीन की मौत हो गई। जब मामला हुआ था, उसी दौरान गगन को लकवा मार गया था। केस की पैरवी और इलाज में लंबे खर्च की वजह से परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी है।
क्या होता है प्रोसिडिंग स्टे
वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्णा नंद तिवारी ने बताया कि किसी भी मामले में जब ट्रायल निचली अदालत में चल रहा होता है तो आरोपी पक्ष हाईकोर्ट में जाते हैं। वहां मामले की वैधानिकता को चुनौती देते हुए अर्जी दाखिल करते हैं। अगर कोर्ट से इस याचिका पर स्टे मिल जाता है तो निचली अदालत में चल रहे मामले में आरोपियों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्यवाही, गिरफ्तारी या पुलिस की कागजी कार्रवाई पर तय अवधि के लिए रोक लग जाती है।
24 घंटे के भीतर हुई थी बरामदगी
तत्कालीन एसपी सिटी केके बिश्नोई ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच आगे बढ़ाई थी। 24 घंटे के भीतर आरोपियों के पास से 44 लाख रुपये बरामद कर लिए गए थे। सूत्रों के मुताबिक आरोपी रुपये की बंदरबांट कर लेने की तैयारी में थे, इसी बंदरबाट में छह लाख रुपये खत्म भी कर चुके थे लेकिन जांच में तेजी का नतीजा यह रहा कि 44 लाख रुपये बरामद हो गए। कुछ दिन बाद ही एसपी सिटी बिश्नोई का तबादला बतौर एसपी संभल जिले के लिए हो गया था।