एमएमएमयूटी में छात्र पर जानलेवा हमले का मामला, पीड़ित और आरोपी के बयान बाद में होंगे दर्ज
एक छात्र के अस्पताल और दूसरे के जेल में होने के कारण बयान बाद में होंगे दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विश्वेश्वरैया छात्रावास में रूममेट पर हमले के मामले में जांच समिति ने दोनों छात्रों का बयान फिलहाल नहीं लेने का निर्णय लिया है। मामले में समिति ने तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। समिति बुधवार को कुलपति प्रो. जेपी सैनी को रिपोर्ट सौंप सकती है।
बताया जा रहा है कि समिति ने मामले में मंगलवार को बैठक की। इसमें चर्चा हुई कि घायल छात्र अस्पताल (एम्स) में भर्ती है जबकि हमले का आरोपी जेल में। समिति ने जेल में जाकर आरोपी का बयान दर्ज करने का निर्णय लिया था लेकिन उसमें तकनीकी पेच की वजह से इसे स्थगित कर दिया गया। अब इन दोनों छात्रों के बयान बाद में दर्ज किए जाएंगे।
समिति ने मंगलवार को रिपोर्ट तैयार कर ली। अब विश्वविद्यालय प्रशासन जो दिशा-निर्देश देगा, उसके आधार पर आगे की जांच बढ़ाई जाएगी।
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पढ़ने में मेधावी हैं दोनों छात्र
शिवांश के पिता अनुपम पांडेय ने बताया कि शिवांश को जेईई मेन में लगभग 81,000 रैंक मिली थी। वह पढ़ने में शुरू से ही मेधावी है। आरोपी भी पढ़ने में मेधावी है। अच्छी रैंक की वजह से ही दोनों छात्रों को सबसे अधिक डिमांड वाले कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश मिला था।
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घायल के इलाज के लिए सहयोग की अपील
एम्स में भर्ती शिवांश के पिता अनुपम पांडेय ने विश्वविद्यालय प्रशासन से इलाज में सहयोग की अपील की है। उन्होंने अपनी आर्थिक तंगहाली बयां करते हुए बताया कि उनके पास बेटे के इलाज के लिए रुपये नहीं हैं। शिवांश के जबड़े का ऑपरेशन कराना पड़ेगा। इलाज में कुल डेढ़ से दो लाख रुपये तत्काल खर्च होंगे। यदि फंड नहीं जुटेगा तो उनके लिए समस्या होगी।
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यह है मामला
प्रयागराज के यमुनानगर मांडा क्षेत्र के बभनी हेथार निवासी शिवांश पांडेय और लखीमपुर खीरी के श्रीनगर निवासी आशीष कुमार एमएमएमयूटी में बीटेक कंप्यूटर साइंस के प्रथम वर्ष के छात्र हैं। दोनों हॉस्टल के एक ही कमरे में रह रहे थे। आरोप है कि जातिगत टिप्पणी को लेकर दोनों में पहले से ही मनमुटाव चल रहा था। दो जनवरी की रात लगभग दो बजे दोनों में कहासुनी हो गई। आरोप है कि इसके बाद आशीष ने ईंट से शिवांश के सिर पर कई वार किए।
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वर्जन
समिति ने फिलहाल दोनों ही छात्रों के बयान दर्ज नहीं करने का निर्णय लिया है। जांच के दौरान कुछ फैक्ट्स मिले हैं, उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपा जाएगा। प्रशासन के दिशा-निर्देश के अनुसार आगे जांच बढ़ाई जाएगी।
- प्रो. एके पांडेय, नियंता, एमएमएमयूटी