खरीदने वालों में कुछ बड़ी फर्में भी शामिल हैं जिनका पैन नंबर पहले से आयकर विभाग के पास मौजूद था। मिलान करने पर पाया गया कि इन्होंने जालसाजी की है। इसके बाद खातों की जांच कराई गई तो रजिस्ट्री में दिखाई गई रकम और बैंक के डिटेल में अंतर पाया गया। अब ये फर्में आयकर विभाग के रडार पर आ गई हैं।
इन फर्मों की अलग से सूची बनाई गई है। इसके अलावा लखनऊ में रहने वाले गोरखपुर के कुछ रईसों ने भी जमीनों की खरीद कर निवेश किए हैं। इनके भी रिकॉर्ड खंगाले गए हैं। प्रारंभिक जांच में आयकर टीम को गड़बड़ी मिली है। इसके बाद सभी के मूल दस्तावेज टीम ने अपने कब्जे में ले लिया।
अब टीम रजिस्ट्री के माध्यम से निवेश की गई रकम और निवेशक के बैंक खातों का डिटेल खंगालेगी ताकि पता चल सके कि कितनी रकम कम दिखाई गई। इसके बाद इन फर्माें और निवेश करने वालों को नोटिस जारी किया जाएगा।
कार्यालय में जांच करती आईटी की टीम
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जांच का आदेश मिलते ही दूसरे दिन पहुंच गई टीम
जमीन की रजिस्ट्री में गलत पैन नंबर दर्ज कराकर आयकर चोरी की आशंका को देखते हुए संयुक्त आयकर निदेशक सोनल सिंह ने चार अगस्त को जांच के आदेश दिए हैं। एक पत्र निबंधन कार्यालय को भी दिया गया है। जांच में गोरखपुर और वाराणसी के दो अधिकारी लीड कर रहे हैं। टीम में गौरव प्रकाश, रतनसेन सिंह, गणेश लाल, अमित गुप्ता, अतुल सिंह शामिल रहे।
10 घंटे तक टीम ने खंगाले रिकॉर्ड
आयकर विभाग की टीम ने मंगलवार को कुल 10 घंटे तक रजिस्ट्री के रिकॉर्ड खंगाले। पहले टीम एआईजी स्टांप के पास गई लेकिन शहर के बाहर होने के चलते फिर उप निबंधक रजत कुमार से जानकारी हासिल की और बड़े निवेश वाली 75 रजिस्ट्री के दस्तावेज मंगाए। सभी की पड़ताल की गई। सूत्रों की मानें तो इस दौरान टीम को कई रजिस्ट्री में गड़बड़ी मिली है। अब आगे जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।