कैंपियरगंज (गोरखपुर)। आवारा कुत्तों के झुंड ने कैंपियरगंज क्षेत्र के रिगौली बंधे के किनारे मंगलवार तड़के करीब तीन बजे 300 भेड़ों पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से झुंड में भगदड़ मच गई। कुत्तों के नोंचने और एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने से दबकर करीब 120 भेड़ों की मौत हो गई, जबकि 85 घायल हैं। घटना से पशुपालक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। ग्रामीणों में भी दहशत है और उन्होंने प्रशासन से कुत्तों को पकड़ने की मांग की है।
महराजगंज के फरेंदा निवासी पूर्णवासी की 300 भेड़ों के साथ चरवाहे चार दिनों से रिगौली बंधे के किनारे ठहरे थे। सोमवार रात बूंदाबांदी के दौरान चरवाहे भेड़ों को लेकर पास के खाली मकान में चले गए। दो चरवाहे भेड़ों की रखवाली के लिए वहीं रुक गए लेकिन रात में उनकी आंख लग गई। इसी दौरान राप्ती नदी किनारे स्थित श्मशान घाट की ओर से आठ-दस कुत्तों का झुंड वहां पहुंच गया और भेड़ों पर टूट पड़ा। चरवाहों ने लाठियां भांजकर कुत्तों को भगाने की कोशिश की लेकिन तब तक झुंड में अफरातफरी मच चुकी थी। कुत्तों से बचने की कोशिश में कई भेड़ें एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गईं और दब गईं। कुछ भेड़ों को कुत्ते नोचकर मारने के बाद उठा ले गए। बाद में ग्रामीणों ने कुत्तों को खदेड़कर मृत भेड़ों को बरामद किया।
सूचना पर पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राकेश कुमार द्विवेदी और मुकेश साहनी मौके पर पहुंचे और घायल भेड़ों का उपचार किया। दोपहर करीब एक बजे पशु चिकित्सक की निगरानी में मृत भेड़ों को गड्ढा खोदकर दबा दिया गया। डॉ. राकेश द्विवेदी के अनुसार, करीब 120 भेड़ों की मौत हुई है। इनमें कुछ की मौत भगदड़ में दबने और कुछ की कुत्तों के हमले में हुई। मृत भेड़ों में 40 से अधिक गर्भवती थीं।
ग्रामीणों के अनुसार, करमैनी घाट के पास श्मशान घाट के आसपास लंबे समय से कुत्तों के झुंड सक्रिय हैं। आरोप है कि ये रिगौली, भैंसला और बेलौहा क्षेत्र में पहले भी बकरियों और दुधारू पशुओं पर हमला कर चुके हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि समय रहते कुत्तों के आतंक पर रोक नहीं लगी तो बच्चों और लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।
बोले अधिकारीघटना दुखद है। मामले की जांच कराई जाएगी और प्रशासन व शासन स्तर से नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।
- आलोक रंजन सिंह, एसडीएम कैंपियरगंज