उरुवा बाजार (गोरखपुर)। रविवार को दादा-दादी को तीर्थ यात्रा पर जाना था। घर में इसकी तैयारी चल रही थी। रिश्तेदार भी विदाई के लिए पहुंचने लगे थे। दादी तारा पांडेय के लिए यह यात्रा खुशियों का मौका थी लेकिन अब वही घर पोते देवांश की याद में डूबा है। जिस बच्चे को वह हर समय अपने आसपास देखती थीं, उसके जाने का दुख उन्हें अंदर तक तोड़ गया है। तारा पांडेय बताती हैं कि देवांश उनके बेहद करीब था। वह दिनभर उनके आसपास खेलता रहता था। दादा-दादी के साथ उसका लगाव ऐसा था कि उनके बिना ज्यादा देर नहीं रहता था। रिश्तेदार भी जब घर आते तो सबसे पहले देवांश को ही ढूंढते थे। तारा के मुताबिक, रविवार को तीर्थ जाने से पहले परिवार के साथ कुछ दिन सुकून से बिताने की उम्मीद थी लेकिन अचानक सबकुछ बदल गया। दादी की आंखों के सामने बार-बार देवांश का चेहरा घूम रहा है। वह कहती हैं कि घर में उसका खेलना-कूदना और आवाजें अब सिर्फ याद बनकर रह गई हैं। देवांश के पिता विनय दिल्ली में नौकरी करते हैं। बेटे की मौत की खबर सुनकर वह घर के लिए रवाना हो गए। परिवार में देवांश का दो माह का छोटा भाई भी है। एक ओर मासूम बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी है तो दूसरी ओर बड़े बेटे के जाने का गम।