पुलिस ने धंधेबाजों के पुराने केस खंगाल कर की तैयारी, अब लगेगा गैंगस्टर
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पुलिस ने मरीज माफिया की कुंंडली तैयार कर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में रामगढ़ताल इलाके के बिना पंजीकरण के मामले में सील ईशु हॉस्पिटल की फाइल फिर खुल गई है। पुलिस व प्रशासन की टीम ने हॉस्पिटल सील कर संचालक समेत 12 आरोपियों पर केस दर्ज किए थे। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के आस-पास से कई एंबुलेंस चालक जो मरीजों का सौदा करते थे, उन्हें भी पकड़कर जेल भिजवाया था।
पुलिस की मानें तो कई आरोपी जमानत पर बाहर हैं। गैंगस्टर की कार्रवाई होने के बाद उनकी एक बार फिर गिरफ्तारी की जाएगी। फरवरी में ईशु हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग के साथ पुलिस व प्रशासन की टीम ने छापा मारा था। बिना पंजीकरण के यह हॉस्पिटल चल रहा था। यहां पर तीन मरीज भर्ती मिले थे। इसमें एक मरीज की मौत हो गई थी। उसे वेंटिलेटर पर लेटाकर परिजनों से वसूली की जा रही थी। इसके बाद पुलिस ने मरीज माफिया के मकड़जाल को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई की थी।
धंधेबाजों का हथियार बना प्रोविजनल सर्टिफिकेट
जिले में मरीज माफिया का जाल हर तरफ फैला है। सूत्रों की मानें तो धंधेबाजों का सबसे बड़ा हथियार प्रोविजनल सर्टिफिकेट बन गया है। अस्पताल के पंजीकरण के लिए धंधेबाज बड़ी आसानी से प्रोविजनल सर्टिफिकेट ऑनलाइन बनवा लेते हैं। स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट से बड़ी आसानी से बिना कागजात के जांच के ही यह सर्टिफिकेट बन जाता है। यह तीन माह तक वैध माना जाता है। धंधेबाज हर तीन माह पर अस्पताल का नाम बदलकर इसे बनवाते रहते हैं। दलालों की मदद से उनका धंधा चमकता रहता है। मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के सामने चल रहे गोल्ड अस्पताल में भी यही खेल चल रहा था।
बृहस्पतिवार को भी मारा छापा
स्वास्थ्य विभाग, पुलिस व प्रशासन की टीम बृहस्पतिवार को भगत चौक स्थित राजश्री हॉस्पिटल पर भी गई थी। वहां हॉस्पिटल का कागज सही मिला, अन्य कोई कमी नहीं मिली। सूत्रों की मानें तो कई अस्पताल अभी प्रशासन के रडार पर हैं। जिन पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
मरीज माफिया की सूची तैयार की जा रही है। रामगढ़ताल इलाके और मेडिकल कॉलेज के आस-पास कार्रवाई हुई थी। इसमें कुछ आरोपियों के नाम दोनों ही जगहों पर प्रकाश में आए थे। उन पर गैंगस्टर की कार्रवाई चल रही है।
- डॉ. गौरव ग्रोवर, एसएसपी