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Gorakhpur News: बीआरडी के पूछताछ काउंटर से ही शुरू हो जाता है मरीज माफिया का खेल

Thu, 22 Feb 2024 04:37 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में पूछताछ काउंटर से लेकर दाई तक का मरीज माफिया गिरोह से सांठगांठ है। सभी को उसके पद के हिसाब से रुपये दिए जाते थे। मेडिकल कॉलेज से इसी बहाने मरीज निजी अस्पतालों में भेजे जा रहे।
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गिरफ्तार किए गए मरीज माफिया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में पूछताछ काउंटर से लेकर दाई तक का मरीज माफिया गिरोह से सांठगांठ है। हरेक को उसके पद के हिसाब से रुपये दिए जाते थे। जांच में सामने आया है कि पूछताछ काउंटर पर ही मरीज को बरगला दिया जाता था और इसके बदले संबंधित कर्मचारी को 500 रुपये मिल जाते थे। सिक्योरिटी गार्ड को 300, दाई को 200, वार्ड ब्वॉय, स्ट्रेचर वाले को 500 रुपये मिलते थे। यह सभी भुगतान नकद में किया जाता है।
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मरीज माफिया मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्पताल में पूछताछ काउंटर से ही मरीज के खरीद-फरोख्त का काम शुरू हो जाता है। जैसे ही बाहर से आने वाले मरीज का तीमारदार वार्ड के बारे में जानकारी लेने के लिए पूछताछ केंद्र पर जाता था, उसे बेड खाली न होने या फिर बेहतर सुविधा न होने की दलील दी जाती थी।

कई मरीज तो यही से नर्सिंग होम चले जाते थे। इसके बाद बाद भी अगर मरीज अंदर गया तो फिर स्ट्रेचर वाला, गार्ड उसे यही बात बताते थे। यहां तक भी मरीज ने बात नहीं मानी और अंदर भर्ती हो ही गया तो फिर वार्ड ब्वॉय, सफाई वाले उसे बरगलाने लगते थे। मरीज के तैयार होने के बाद ये लोग नेटवर्क से जुड़े लोगों को इसकी सूचना देते थे। उमेश इस गिरोह का संचालक है। बिट्टू यादव और मोहम्मद असलम वार्ड में घूमकर बरगलाए गए मरीज को लेकर नर्सिंग होम जाते थे। उमेश भारती गार्ड, जबकि दीनयाल, और महेंद्र वार्ड व्वॉय हैं>
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बड़े नर्सिंग होम के नाम देते हैं धोखा, 10 और नर्सिंग होम रडार पर
आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज से मरीज को बाहर बड़े नर्सिंग होम के नाम पर लाया जाता है। उसे ऐसे नर्सिंग होम का नाम बताया जाता है जो प्रतिष्ठित है। उसी विश्वास पर लोग बाह आते हैं।

बाहर आते ही तीमारदार को मरीज माफिया गिरोह में शामिल लोग बड़े अस्पताल में महंगा इलाज बताकर सस्ता और बेहतर इलाज कराने का झांसा देकर सेटिंग वाले अस्पताल में लेकर चले जाते हैं।पुलिस की जांच में सामने है कि शहर के 10 और नर्सिंग होम ऐसे हैं, जो इसी तरह के नेटवर्क के भरोसे संचालित किए जा रहे हैं। इन संदिग्ध नर्सिंग होम की जांच तेज कर दी गई है। सबूत मिलते ही उन पर कार्रवाई की जाएगी।
 

मकान मालिक भी चेते, एक साल का तो करें ही एग्रीमेंट
एसएसपी ने कहा कि जितनी बार भी जांच में फर्जी नर्सिंग होम सामने आए हैं, उसमें से ज्यादातर का संचालन किराये के भवन में होने की बात सामने आई है। इसलिए मकान मालिक को भी चाहिए कि अगर वह किसी को किराये पर अस्पताल चलाने के लिए दे रहे हैं तो वह कम से कम एक साल का एग्रीमेंट करें और यह जरूर देखे कि जिस अस्पताल के संचालन के लिए दे रहे हैं, उसमें कोई डॉक्टर है या नहीं। क्योंकि, भवन का कार्मिशियल उपयोग किया जा रहा है, वह भी बिना लिखा पढ़ी है। ऐसे में भविष्य में सुधार नहीं हुआ तो पुलिस ऐसे मकान मालिक पर भी कार्रवाई करेगी।
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कार्रवाई देखकर डॉक्टर ने हटा लिया था नाम
पुलिस का एंबुलेंस मरीज माफिया पर हो रही कार्रवाई का ही असर है कि यूनिवर्सल हॉस्पिटल में अपनी डिग्री देकर पंजीकरण कराने वाले डॉक्टर ने अपना नाता तोड़ दिया था। लिखा पढ़ी में चार महीने पहले ही डॉक्टर ने अस्पताल में सेवा न देने की पत्र दे दिया और सीएमओ कार्यालय को भी इसकी सूचना दे दी थी। इसके बाद ही सीएमओ कार्यालय की ओर से यूनिवर्सल हॉस्पिटल को नोटिस भी जारी की गई थी।
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