फर्जी आईएएस, आईपीएस के बाद अब पुलिस की गिरफ्त में आए फर्जी इंस्पेक्टर दिग्विजयनाथ की जांच में एक और पर्दाफाश हुआ है। आरोपी ने खुद को आईजी कार्मिक का पीआरओ बताकर युवकों को पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने का लालच देकर रुपये ऐंठ रहा था।
इसका पर्दाफाश आरोपी के कब्जे से बरामद 82 युवकों के दस्तावेज और आईजी की मोहर मिलने के बाद हुआ। पुलिस अब दस्तावेजों के आधार पर ठगी के शिकार युवकों से संपर्क कर रही है। पुलिस ने बुधवार को आरोपी को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
सिकरीगंज पुलिस ने मंगलवार को पुलिस इंस्पेक्टर की वर्दी पहने कार सवार बेलघाट के ग्राम लखवापाकड़ निवासी दिग्विजयनाथ को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान वह अपने पद और तैनाती से संबंधित कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने फर्जी दस्तावेजों के सहारे खुद को पुलिस अधिकारी बताकर ठगी करने की बात स्वीकार की थी।
पुलिस ने आरोपी के पास से भारी मात्रा में 82 युवकों के अटैस्टेशन फॉर्म, फर्जी नियुक्ति पत्र, चिकित्सीय प्रमाण पत्र और शपथ पत्र, हेड कांस्टेबल भर्ती के खाली प्रोफार्मा और शपथ पत्र बरामद किए थे। पुलिस ने आरोपी के पास से बरामद दस्तावेजों के आधार पर जब युवकों से संपर्क किया तो उन्होंने पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य सरकारी विभाग में नौकरी दिलाने के एवज में रुपये लेने की बात कही।
ठगी के शिकार युवकों ने बताया कि आरोपी खुद बेरोजगार युवकों से संपर्क करता और आईजी कार्मिक का पीआरओ होने का दावा कर सरकारी विभागों में नियुक्ति दिलाने का भरोसा देता था। झांसे में आए युवक उसे रुपये दे रहे थे। पुलिस दस्तावेजों के आधार पर ठगी के शिकार युवकों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है। ठगी के शिकार पीड़ितों में गोरखपुर के अलावा गाजीपुर, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, हरैया बस्ती, अयोध्या, उरई जालौन, संग्रामपुर अमेठी, मड़ना महाराजगंज, धनघटा, संतकबीरनगर के युवक शामिल हैं।
आरोपी को जेल भिजवा दिया गया है। उसके पास से बरामद दस्तावेजों का सत्यापन करने के साथ ही ठगी के शिकार युवकों से भी संपर्क किया गया है। साथी आरोपी से जुड़े लोगों की सूची और आरोपी के नेटवर्क की जांच की जा रही है: दिनेश पुरी, एसपी उत्तरी