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गीडा : कच्चे माल का दाम बढ़ने से प्लास्टिक उत्पाद महंगे

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पश्चिम एशिया में संघर्ष का दुष्प्रभाव : फैक्टरियों में कम हुआ उत्पादन, बढ़ गई है लागत
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परिवहन का चार्ज भी 15 प्रतिशत तक बढ़ा


गोरखपुर। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) क्षेत्र के उद्योग इस समय बढ़ती लागत और घटती मांग की दोहरी मार झेल रहे हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर प्लास्टिक उद्योगों पर पड़ा है। प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के दाम तेजी से बढ़ने के कारण उद्योगों की उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है। इसका असर अब बाजार में उपलब्ध प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
उद्यमियों के अनुसार, प्लास्टिक उद्योग में इस्तेमाल होने वाले पॉलीमर और अन्य कच्चे माल की कीमतों में 25 से 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं परिवहन खर्च भी करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिससे उत्पादन लागत और अधिक बढ़ गई है। बढ़ती लागत के कारण कई इकाइयों ने उत्पादन में कटौती कर दी है। इसका असर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। प्लास्टिक की बाेतलों और अन्य उत्पादों की कीमतें बढ़ गई हैं। इससे आम लोगों को भी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
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बोले उद्यमी
पॉलीमर की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जो कच्चा माल पहले 95 रुपये प्रति किलो के आसपास उपलब्ध था, वह अब 135 रुपये तक पहुंच गया है। इसके चलते पैकेजिंग सामग्री की लागत बढ़ गई है। बढ़ी हुई कीमतों का असर बिक्री पर भी पड़ा है और कंपनी का उत्पादन करीब 25 प्रतिशत तक घट गया है।
-विनय चांदवासिया, निदेशक, एसडी इंटरनेशनल लिमिटेड

पहले जिस प्लास्टिक कच्चे माल की कीमत 115 रुपये प्रति किलो थी, वह अब बढ़कर 185 रुपये तक पहुंच गई है। कच्चे माल की कीमतों में 50 से 60 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, जबकि उत्पादन लागत में करीब 40 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इसके चलते कंपनी का उत्पादन 25 से 30 प्रतिशत तक कम हो गया है। बढ़ती लागत की भरपाई के लिए उत्पादों के दाम भी 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ाने पड़े हैं।
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- ओम बाबू अग्रहरी, प्रोपराइटर, एसडी इंडस्ट्रीज

बाजार में प्लास्टिक उत्पादों की कीमतें औसतन 20 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। प्लास्टिक कच्चे माल की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है, जिससे उद्योगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कीमतों में वृद्धि के कारण उपभोक्ताओं की खरीदारी भी कम हुई है और बिक्री पर नकारात्मक असर पड़ा है।
- विशाल गुप्ता, महासचिव, गोरखपुर डिस्पोजल एसोसिएशन
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