गोरखपुर। नकली दवाओं के धंधे पर अंकुश लगाने के लिए ड्रग विभाग ने जिले में होलसेल दवा लाइसेंसों का सत्यापन अभियान तेज कर दिया है। अभियान के तहत यह जांच की जा रही है कि लाइसेंस लेने के बाद संबंधित संचालक वास्तव में दुकान संचालित कर रहे हैं या नहीं।
अब तक 120 से अधिक होलसेल मेडिकल स्टोर का सत्यापन किया जा चुका है जिनमें करीब 10 दुकानें बंद मिली हैं। विभाग ने इन संचालकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनके लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति शासन को भेजी जाएगी। ड्रग विभाग की टीम लगातार जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अभियान चलाकर थोक दवा लाइसेंस धारकों का भौतिक सत्यापन कर रही है। जांच के दौरान दुकान का संचालन, दवा भंडारण की व्यवस्था और लाइसेंस की शर्तों के पालन की भी पड़ताल की जा रही है।
ड्रग इंस्पेक्टर सिद्धेश्वर शुक्ला का कहना है कि जिन दुकानों का संचालन नहीं मिला है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिले में करीब पांच हजार मेडिकल स्टोर के पास लाइसेंस है। इनमें लगभग दो हजार के पास होलसेल दवा लाइसेंस है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वास्तविक और नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों के पास ही लाइसेंस रहें ताकि दवाओं की आपूर्ति व्यवस्था पारदर्शी और सुरक्षित बनी रहे।
दरअसल हाल ही में प्रदेश सरकार ने नकली दवाओं के बढ़ते कारोबार को देखते हुए नए होलसेल दवा लाइसेंस जारी करने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने सभी सहायक आयुक्तों और औषधि निरीक्षकों को प्रदेशभर में थोक और फुटकर दवा विक्रेताओं के लाइसेंस का व्यापक सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अनुसार, विभिन्न जिलों में गोदाम बनाकर बड़े पैमाने पर नकली दवाओं के कारोबार की सूचनाएं मिलने के बाद यह निर्णय लिया गया। सत्यापन अभियान पूरा होने और रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पात्र आवेदकों को नए होलसेल लाइसेंस जारी किए जाएंगे।