गोरखपुर। दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में शुक्रवार को एक विभागीय संगोष्ठी आयोजित हुई। विषय पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों की समकालीन उपादेयता था। वक्ताओं ने उनके राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विचारों की वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता पर चर्चा की। विभाग प्रभारी इंद्रेश कुमार ने एकात्म मानववाद को भारतीय चिंतन परंपरा पर आधारित विचारधारा बताया। उन्होंने कहा कि यह व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और मानवता के संतुलित विकास पर जोर देती है। इंद्रेश कुमार ने सामाजिक समरसता, अंत्योदय और स्वावलंबन के विचारों को आज भी महत्वपूर्ण बताया। प्रियंका सिंह ने कहा कि राष्ट्र की वास्तविक प्रगति समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण से आंकी जानी चाहिए। अखिलेश श्रीवास्तव ने एकात्म मानववाद, विकेंद्रीकरण, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को वर्तमान चुनौतियों के संदर्भ में उपयोगी बताया। संगोष्ठी में महाविद्यालय के शिक्षक, विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहे। पंडित दीनदयाल के एकात्म मानववाद के विचार आज भी महत्वपूर्ण हैं। यह विचारधारा सामाजिक समरसता, अंत्योदय और स्वावलंबन पर केंद्रित है। उनके अनुसार, समाज के अंतिम व्यक्ति का कल्याण ही राष्ट्र की सच्ची प्रगति है। विकेंद्रीकरण, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता जैसे सिद्धांत वर्तमान समय की चुनौतियों का समाधान प्रदान करते हैं।