वर्ष 1917 में परमहंस योगानंद ने भारत में योगदा सत्संग सोसाइटी की स्थापना की। यह आज भी आश्रमों, ध्यान केंद्रों, शिविरों और प्रकाशनों के माध्यम से देशभर में उनकी शिक्षाओं का प्रसार कर रही है। क्रिया योग सहित योगदा ध्यान-पद्धति के द्वारा, भारत और विश्व के साधक उनके मार्गदर्शन से प्रेरणा पाते हुए अंतःस्थ शांति और दिव्य संयोग की रुपांतरकारी शक्ति का अनुभव कर रहे हैं।
पूरी दुनिया को योग का पाठ पढ़ने वाले योग गुरु परमहंस योगानंद की 133वीं जयंती पर सोमवार सुबह 8 बजे से घोष कंपनी चौराहे से भव्य प्रभात फेरी निकाली गई।
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जय गुरु.. जय गुरु.. जय गुरु..जय के जयकारों के साथ परमहंस योगानंद की पालकी को कंधे पर रखकर अनुयायी बड़े ही आस्था भाव के साथ शहर की कोतवाली मुफ़्तीपुर स्थित परमहंस योगानंद की जन्मस्थली तक पहुंचे। प्रभात फेरी के दौरान अनुयायियों ने रास्ते भर पुष्प वर्षा की।
प्रभात फेरी के दर्शन स्थानीय लोग भी बड़े ही आस्था भाव के साथ कर रहे थे। जन्मस्थली पर प्रभात फेरी के पहुंचने के बाद प्रवेश द्वार पर परमहंस योगानंद का ध्यान लगाया गया, इसके बाद प्रभात फेरी में शामिल अनुयायी अंदर प्रवेश किए। इस दौरान योगदा सत्संग समिति, अमेरिका से आए स्वामी विश्वानंद गिरी और उनके साथ चार साध्वी, रांची से स्वामी सौम्यानंद शामिल हुए।