एम्स में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) में प्रवेश लेने के मामले में नए तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व निदेशक प्रो. गोपाल कृष्ण पाल के बेटे ओरो प्रकाश पाल ने प्रवेश के बाद दो दिन क्लास में पढ़ाई भी की थी।
वाद दाखिल होने की जानकारी हुई तो वह अचानक गायब हो गया। सूत्रों ने बताया कि विवाद बढ़ता देख तत्कालीन ईडी जीके पाल ने बेटे को गोरखपुर एम्स से दूर कर दिया था। दो जनवरी 2024 को एम्स पटना के ईडी प्रो. गोपाल कृष्ण पाल को एम्स गोरखपुर का कार्यवाहक ईडी बनाया गया था।
प्रो. पाल को छह महीने के लिए एम्स गोरखपुर भेजा गया। दो जुलाई 2024 को एक बार फिर तीन महीने का कार्यकाल बढ़ाया गया। दो अक्तूबर को कार्यकाल पूरा होना था लेकिन अगस्त में लगे आरोप की वजह से छह दिन पहले ही उन्हें हटा दिया गया।
आरोप है कि जीके पाल ने 30 अगस्त 2024 को बेटे का एमडी सीट पर प्रवेश कराया था जबकि अक्तूबर में उनकी सेवा पूरी हो रही थी। वाद में आरोप लगाया गया कि उन्होंने बेटे का अन्य पिछड़ा वर्ग नॉन क्रीमीलेयर का प्रमाणपत्र बनवाया था।
इसके आधार पर बेटे का प्रवेश कराया जबकि पूर्व ईडी व उनकी पत्नी पार्वती पाल की सालाना सैलरी 80 लाख रुपये से ज्यादा थी। एम्स में रिकार्डेड दस्तावेजों के आधार पर मंत्रालय की तरफ से जीके पाल की सेवा गोरखपुर एम्स से खत्म कर दी गई थी।
आरोप लगने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से तत्कालीन ईडी पर कार्रवाई करते हुए हटा दिया गया था। बेटे के प्रवेश को भी तत्कालीन जिम्मेदारों ने कैंसिल करवा दिया था। एम्स प्रबंधन की तरफ से मामले में किसी तरह की कोई कार्रवाई न तो लंबित है और न ही की जाएगी: विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स