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Gorakhpur News: इंसेफेलाइटिस नियंत्रण और स्कूल ड्राॅप आउट रेट कम करने में टेक्नोलॉजी की बड़ी भूमिका

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गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रौद्योगिकी जीवन को और भी स्पीड अप (तीव्र गतिशील) कर सकती है। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी (उभरती नई प्रौद्योगिकी) के कई उदाहरणों से इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी जीवन और विकास से जुड़े हर क्षेत्र को नई उड़ान और नई ऊंचाई दे सकती है। विकसित और आत्मनिर्भर भारत और विकसित एवं आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के लिए हमें इमर्जिंग टेक्नोलॉजी को प्रत्येक क्षेत्र का हिस्सा बनाना पड़ेगा।
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सीएम योगी बुधवार शाम महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) में विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश 2047 कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने टेक्नोलॉजी को समस्या समाधान के लिए महत्वपूर्ण बताया। इसके लिए इंसेफेलाइटिस नियंत्रण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2017-18 के पहले प्रतिवर्ष बड़े पैमाने पर इंसेफेलाइटिस से मौतें होती थीं। 40 वर्ष में 50 हजार मौतें इंसेफेलाइटिस से हुईं। सांसद के रूप में वह इस पर आंदोलन करते थे लेकिन 2017 में जब मुख्यमंत्री बने तो समाधान की जिम्मेदारी आई। सीएम ने बताया कि डेटा कलेक्ट कर उन्होंने बीमारी के कारण और समाधान पर टीम लगाकर काम शुरू कराया। पता चला कि इंसेफेलाइटिस उन परिवारों और बस्तियों में अधिक थी जहां स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता का अभाव था। उन्होंने ऐसे परिवारों के लिए शौचालय और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित कराई। इसका परिणाम यह हुआ कि छह वर्ष में इंसेफेलाइटिस से मौत के आंकड़े शून्य हो गए।

समस्या का समाधान दे सकती है टेक्नोलॉजी
मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी हमें समस्या का समाधान दे सकती है, जरूरत है उसके अनुरूप रणनीति बनाने की है। गन्ना किसानों की समस्या समाधान की चर्चा करते हुए सीएम योगी ने कहा कि उन्होंने टेक्नोलॉजी से गन्ना किसानों के लिए पर्ची की व्यवस्था उनके स्मार्टफोन पर देने की व्यवस्था बनाई। इससे बिचौलियों की दलाली भी बंद हुई, घटतौली की समस्या का भी समाधान हुआ। 2017 के पहले हताश रहने वाला किसान अब उत्साहित रहता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जो लोग यह कहते हैं कि किसानों की आमदनी नहीं बढ़ी, वे या तो किसान नहीं हैं या फिर खेती के बारे में नहीं जानते हैं।
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कृषि में लाभकारी बन रही है इमर्जिंग टेक्नोलॉजी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा इमर्जिंग टेक्नोलॉजी कृषि क्षेत्र में बहुत लाभकारी बन रही है। रियल टाइम डेटा से किसान जान सकते हैं कि उनके खेत में कब और कितने उर्वरक और सिंचाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यूपी में 2017 के पहले कृषि विकास दर 6 से 7 प्रतिशत थी जो अब बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। यदि इमर्जिंग टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल हो तो इसे 30 प्रतिशत तक किया जा सकता है।



क्षेत्र के हिसाब से बना रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र के हिसाब से अलग अलग इमर्जिंग टेक्नोलॉजी के हब और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जा रहे हैं। इसी क्रम में आगरा में आलू का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जा रहा है। कन्नौज और बस्ती में फल एवं सब्जी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में चावल का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है। वहां एक हेक्टेयर खेत में 100 क्विंटल उत्पादन में सफलता मिली है जो पारंपरिक उत्पादन 40 क्विंटल से ढाई गुना अधिक है।

शिक्षा और स्वास्थ्य में इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की बेहद कारगर भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य में इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की बेहद कारगर भूमिका हो सकती है। 2017 के पहले प्रदेश में स्कूलों से बालिकाओं का ड्राॅप आउट रेट 19 से 20 प्रतिशत था। जब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर कारणों का पता लगाया गया और उसके अनुरूप शुद्ध पेयजल, शौचालय आदि की व्यवस्था की गई तो ड्राप आउट रेट घटकर तीन प्रतिशत पर आ गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में टेली कंसल्टेशन काफी महत्वपूर्ण है। इससे मरीज को देश और दुनिया के एक्सपर्ट से बीमारी के इलाज में सलाह मिल सकती है। इसी तरह मेडिकल उपकरणों, दवाओं और ब्लड को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में ड्रोन का इस्तेमाल हो सकता है।



हेल्थकेयर में आएगा एआई का सबसे बड़ा प्रभाव : एन. चंद्रशेखरन
मुख्य अतिथि टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश की परिकल्पना को साकार करने के अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। कहा कि भविष्य में एआई हर समस्या का समाधान प्रस्तुत करेगी। एआई से कई दवाओं के निर्माण में मदद मिल रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि अगले कुछ दशक में एआई के सहयोग से उन बीमारियों के लिए भी दवा बन सकेगी, जिन्हें अभी लाइलाज मान लिया गया है। डायबिटीज और हर तरह के कैंसर के इलाज में भी एआई से चमत्कारिक मदद मिलेगी। आगामी समय में भारत में एआई से जुड़े अविष्कार बड़ी संख्या में होंगे। स्वागत संबोधन में एमजीयूजी के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति यात्रा का विस्तार से उल्लेख किया। कार्यक्रम में मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के एमडी एवं सीईओ के. कृतिवासन, टीसीएस आई-ऑन के हेड वेंगुस्वामी रामास्वामी, टीसीएस के ग्लोबल हेड चंद्रमोहन मल्लाडी, मुख्यमंत्री के प्रशासनिक सलाहकार अवनीश अवस्थी, इंटरनेशनल पोटैटो रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह, भारत सरकार के पूर्व औषधि महानियंत्रक डॉ. जीएन सिंह, गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ग्रेटर नोएडा के निदेशक डॉ. राजेश गुप्ता, महायोगी गोरखनाथ मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. वर्षा, एमजीयूजी के कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव सहित कई जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।

सीएम ने किया विद्यार्थियों और किसानों को सम्मानित
एमजीयूजी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गिनीज रिकाॅर्ड एआई फॉर आल अवेयरनेस कार्यक्रम में योगदान देने वाले विद्यार्थियों और हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने एआई फॉर फार्मर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े पांच किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष एमजीयूजी और सेंटर ऑफ मेडिकल इनोवेशन गवर्नमेंट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ग्रेटर नोएडा के साथ एक एमओयू का भी आदान प्रदान हुआ।
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