- गोरखपुर विश्वविद्यालय के बीटेक छात्रों की टीम आर्क ने विकसित किया एआई आधारित पशु चिकित्सा एप
गोरखपुर। पालतू जानवर अपनी तकलीफ बता नहीं सकते। ऐसे में उनकी बीमारी की गंभीरता समझने में मदद के लिए गोरखपुर विश्वविद्यालय के बीटेक छात्रों की टीम आर्क ने एआई आधारित एप वीक्योरा विकसित किया है। यह लक्षणों के आधार पर बीमारी की गंभीरता और पशु चिकित्सक की जरूरत का आकलन करेगा।
वीक्योरा में पशु मालिक सामान्य भाषा में पालतू के लक्षण दर्ज कर सकते हैं। एआई इन जानकारियों का विश्लेषण कर जरूरत के अनुसार सवाल पूछता है। आरएजी तकनीक, क्लीनिकल नियमों और सुरक्षा लेयर की मदद से बीमारी की स्थिति को कम, मध्यम, अधिक या गंभीरतम श्रेणी में रखा जाता है। यह एप केवल बीमारी की जानकारी देने तक सीमित नहीं है। यह गलत घरेलू उपचार और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा देने से भी सावधान करता है। इसमें क्या करें और क्या न करें की जानकारी दी जाती है ताकि पालतू को नुकसान से बचाया जा सके। टीम आर्क में नितिन कुमार, अनामता शाबी, जिज्ञासा सिंह, आरब्ध शर्मा, अंश कुमार और तिजिल सोनकर शामिल हैं। इस टीम को गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित स्मार्ट इंडिया हैकथॉन में इस एप के लिए तीसरा स्थान मिला है।
डॉक्टर के लिए तैयार करेगा पूरी जानकारी
वीक्योरा में पशु चिकित्सक के लिए जानवर की जानकारी, लक्षण, उनकी अवधि, गंभीर संकेत और तात्कालिकता का स्तर एक जगह व्यवस्थित हो जाता है। इससे डॉक्टर को समस्या समझने और उपचार संबंधी निर्णय लेने में आसानी होती है।
चार परतों वाली सुरक्षा व्यवस्था में काम करता है वीक्योरा
वीक्योरा विकसित करने वाली टीम आर्क के टीम लीडर नितिन कुमार के मुताबिक, एआई सामान्य भाषा में बताए गए लक्षणों को समझकर व्यवस्थित करता है। इसके बाद आरएजी विश्वसनीय पशु चिकित्सा स्रोतों से संबंधित जानकारी जुटाता है। मशीन लर्निंग के जरिये गंभीर संकेतों और सुरक्षा जोखिमों की जांच की जाती है। इसके बाद पशु चिकित्सक अंतिम चिकित्सकीय निर्णय लेता है। वीक्योरा की मूल अवधारणा है- एआई लक्षणों को समझे, विश्वसनीय स्रोतों से मदद ले, मशीन लर्निंग खतरे पहचाने और अंतिम निर्णय पशु चिकित्सक का हो।
वीक्योरा पशु चिकित्सक का विकल्प नहीं है बल्कि समय पर सही चिकित्सकीय मदद लेने के लिए शुरुआती चेतावनी और मार्गदर्शन देने वाला सुरक्षा-केंद्रित एप है।
- नितिन कुमार, टीम लीडर, आर्क