शिक्षकों की जांच के विरोध में उतरे शिक्षक संघ के अध्यक्ष बोले, शासनादेश बिना कार्य परिषद को सूचित किए लागू नहीं होता अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो विनोद सिंह ने शिक्षकों की जांच का विरोध किया है। कहा है कि विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के उल्लंघन व व्यावहारिक दिक्कतों के नाते इसका विरोध कर रहा हूं। विश्वविद्यालय में कोई भी शासनादेश बिना कार्य परिषद को सूचित किए लागू नहीं होता। शासनादेश में वर्णित जांच कमेटी असंवैधानिक रूप से निर्मित की गई है। क्योंकि विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य, सहयुक्त आचार्य व आचार्य के कैडर की पोस्ट है। जबकि कमेटी में एक सदस्य सहयुक्त आचार्य है। उच्च शिक्षा की ओर से जारी शासनादेश विश्वविद्यालयों में सीधे लागू नहीं हो सकते हैं। जांच को समझ से परे बताते हुए प्रोफेसर सिंह ने कहा कि कोरोना की वजह से एक साथ एक समय पर एक स्थान पर अत्यधिक लोगों को बुलाना और भी अव्यावहारिक है। आदेश में 50 की नोटरी/बयान हल्फी भी देना है। जबकि मौजूदा समय में कोर्ट पूरी तरह से बंद/सील है। अधिकांश शिक्षकों के प्रमाण पत्र अपने मूल आवासों पर हैं। ऐसे में उसे लाना अभी संभव नहीं है। कहा कि उपरोक्त आदेश से शिक्षकों में नाराजगी है।