इसके बाद 21 जुलाई को उसे टीबी अस्पताल में भेज दिया गया। आरोप लगाया गया कि यहां केवल कोरोना का इलाज चल रहा था। हर्पीस का कोई इलाज नहीं हो रहा था। पूरे शरीर में असहनीय दर्द था। उन्हें तत्काल आइसीयू की जरूरत थी। इसे लेकर उच्चाधिकारियों से कई बार इस वार्ता की गई। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इलाज की समुचित व्यवस्था न मिल पाने के कारण मां की जान चली गई। अब चिकित्सीय रिपोर्ट मांगा जा रहा है तो अस्पताल प्रशासन उसे भी देने को तैयार नहीं है।
सीएम को किया ट्वीट
महिला की बेटी ने बताया कि इसे लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को ट्वीट किया गया। मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत भी की गई। लिखा कि कहीं और रेफर करके इलाज किया जाए। क्योंकि टीबी अस्पताल में इलाज की कोई सुविधा नहीं है। लेकिन कोई जवाब कहीं से नहीं मिला। अंत में मेरी मां की मौत हो गई।
आरोप पूरी तरह से निराधार है। अस्पताल में भर्ती मरीज की पूरी देखभाल की जा रही थी। इलाज में कोई लापरवाही नहीं की गई। उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जा रहा था। -डॉ. एके चौधरी, संयुक्त निदेशक, टीबी अस्पताल