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डॉक्टरों की सलाह: बाल और नाखून को छोड़कर किसी भी अंग में हो सकती है टीबी, दवा छोड़ी तो जा सकती है जान

Tue, 30 Nov 2021 12:33 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

टीबी की बीमारी को हल्के में न लें, टीबी के मरीज न छोड़ें दवा, वरना जा सकती है जान।

 
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टीबी के मरीज - फोटो : Social Media
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विस्तार
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बाल और नाखून को छोड़कर शरीर के किसी भी अंग में टीबी (ट्यूबरक्लोसिस) हो सकती है। लिहाजा, प्रारंभिक लक्षण मिलते ही इसकी जांच कराएं और निर्धारित अवधि तक दवा अवश्य लें। जिले में टीबी मरीजों की बढ़ती संख्या को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की गोरखपुर इकाई व बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने यह हिदायत दी है।

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 जानकारी के मुताबिक, जिले में टीबी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। फेफड़े, पेट, ग्लैंड, ब्रेन और बोन टीबी से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस मौसम में टीबी के मरीज दवा बिल्कुल भी न छोड़ें। अगर दवा का सेवन बंद कर देंगे तो यह जानलेवा हो सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि सबसे खतरनाक पेट, ब्रेन और बोन टीबी है। इन तीनों टीबी की पहचान जल्दी नहीं हो पाती है।

यह लक्षण दिखें तो कराएं जांच
दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना सामान्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण मिलने पर तत्काल जांच कराएं।
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एक नजर मरीजों की स्थिति पर

वर्ष                             मरीज
2019                          11473
2020                          8658
2021                          6789

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अश्वनी मिश्रा ने कहा कि  टीबी की दवा ज्यादा दिनों तक चलती है, लेकिन मरीज बीच में दवा छोड़ देते हैं, इस वजह से टीबी का संक्रमण शरीर के अन्य हिस्सों में फैल जाता है। ऐसे केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मरीजों के फेफड़े और पेट में पानी भरने की भी शिकायतें मिल रही हैं। प्रतिदिन आठ से 10 मरीज आ रहे हैं। इसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी भी कहते हैं।

आईएमए सचिव डॉ वीएन अग्रवाल ने कहा कि आमतौर पर पहले फेफड़े की टीबी वाले मरीज इलाज के लिए आते थे, लेकिन अब पेट, ग्लैंड, ब्रेन और बोन टीबी के मरीज भी आ रहे हैं। टीबी शरीर के नाखून और बाल को छोड़कर किसी भी हिस्से में हो सकती है। ऐसी स्थिति में अगर टीबी के लक्षण दिखते हैं तो तत्काल जांच कराएं। 70 फीसदी मरीजों में पल्मोनरी और 30 फीसदी में एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी होती है।



 
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