बेटियां भी समाज में बराबरी की हकदार हैं। आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर से बेटियों में आत्मविश्वास बढ़ता है। सरकार ने महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए कड़े कानून बनाए हैं। प्रारंभिक रूप से अपना बचाव करते हुए डायल 112, 1090 की मदद से खुद को सुरक्षित कर सकती हैं।
ये बातें अमर उजाला की अपराजिता मुहिम के तहत इमामबाड़ा मुस्लिम गर्ल्स इंटर कॉलेज में आयोजित सात दिवसीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर के पहले दिन ताइक्वांडो कोच विशाल कुमार ने कहीं। प्रशिक्षण के दौरान कोच और उनकी टीम ने बेटियों को दुश्मन पर काबू पाने की आसान तकनीक बताई। साथ ही विपरीत परिस्थितियों में पेन, चाबी, हेयर पिन को आत्मरक्षा के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना सिखाया।
स्कूल की प्रधानाचार्य नाहिद आसिम ने कहा कि बेटियों को सशक्त बनाने में ऐसे प्रशिक्षणों का आयोजन मील का पत्थर साबित होगा। शिविर में 211 छात्राओं ने प्रतिभाग किया। डॉ. मंजू मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. कनीज रजा, सबीना बेगम, सलमा सुल्तान, रीता, शाहीन ने सराहनीय भूमिका निभाई। प्रशिक्षण देने वालों में ताइक्वांडो कोच प्रतिज्ञा उपाध्याय, रुद्र त्रिपाठी, सनी सिंह, नैंसी पासवान आदि लोग मौजूद रहे।
ये बोलीं छात्राएं
आत्मरक्षा के गुर प्रशिक्षकों ने सिखाए हैं। लाठी-डंडा के वार तक को तकनीक के माध्यम से बेकार किया जा सकता है। रोजाना इसकी प्रैक्टिस कर खुद को मजबूत बनाऊंगी।
- फरीन फातिमा, कक्षा 9
समाज में लड़कियों की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। मगर, अब भी हमें लंबा रास्ता तय करना है। अभियान से जुड़कर लड़कियों की स्थिति में बदलाव लाया जा सकता है। इस तरह के कार्यक्रम समय की मांग हैं।
- तहजीन जहीर सोलकर, कक्षा-10
ताइक्वांडो टीम ने उपलब्ध संसाधनों के सहारे आत्मरक्षा के उपायों की बहुत सटीक जानकारी दी। मनचलों के वार को बेकार करने की ये तरकीबें काम आ सकती है। आत्मरक्षा का यह प्रशिक्षण भविष्य में हमारे बहुत काम आने वाला है।
- आयशा, कक्षा 9
ताइक्वांडो प्रशिक्षकों में ज्यादातर लड़कियां हैं। उन्होंने अपने आपको मजबूत बना लिया है। हम भी उनके जैसे बनेंगे। पीछे कोई वार करे तो बचाव कैसे करें, इसका भी तरीका प्रशिक्षकों ने सिखाया है।
- समरा खान, कक्षा-9