गोरखपुर। ड्रग माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने गोरखपुर मंडल में निगरानी की प्रणाली में बदलाव किया है। नए साल में मंडल के चारों जिलों गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज और कुशीनगर में एक-एक ड्रग इंस्पेक्टरों की तैनाती के साथ ही दो अतिरिक्त ड्रग इंस्पेक्टर भी सर्विलांस के लिए तैनात किए जाएंगे।
खास बात यह है कि सर्विलांस टीम सहायक आयुक्त औषधि के अधीन काम करेगी और किसी भी जिले में बिना किसी पूर्व सूचना के छापा मार सकेगी। यह टीम स्वयं ही आंकड़े जुटाकर काम करेगी। इससे जिलों में ड्रग इंस्पेक्टरों का एकाधिकार भी टूटेगा।
गोरखपुर मंडल के चारों जिलों में कुल मिलाकर करीब 9500 दवा की दुकानें हैं। गोरखपुर जिले में लगभग चार हजार मेडिकल स्टोर्स हैं। इन दुकानों से हर दिन करीब दो से तीन करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद बिक्री होती है। दवाइयों की निगरानी के लिए हर जिले में एक ड्रग इंस्पेक्टर का पोस्ट है, लेकिन इस समय देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज जिले में ड्रग इंस्पेक्टर का पद रिक्त है। गोरखपुर जिले में ड्रग इंस्पेक्टर व उनके कार्यालय के एक कर्मचारी को निलंबित किया गया था। अभी गोरखपुर का चार्ज बस्ती जिले के ड्रग इंस्पेक्टर के पास है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर गोरखपुर, देवरिया और महराजगंज जिले में नए ड्रग इंस्पेक्टरों की तैनाती का आदेश निर्गत कर दिया गया है। गोरखपुर मंडल को अलग से सर्विलांस टीम के लिए भी दो ड्रग इंस्पेक्टरों के पद सृजित हुए हैं, जिनकी तैनाती इसी वित्तीय वर्ष में मार्च से पहले हो जाएगी। नए ड्रग इंस्पेक्टरों के आने से जहां रूटीन की जांच में आने वाली बाधा खत्म होगी, वहीं ड्रग इंस्पेक्टरों की सर्विलांस टीम बनाकर गोरखपुर समेत पूरे मंडल में अलग से भी जांच कराई जाएगी। इसके अलावा बॉर्डर पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी, जिससे कि नशीली व नकली दवाओं के धंधे पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।
पूरनचंद, सहायक आयुक्त औषधि-गोरखपुर