निदेशक ने बताया कि एम्स में सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टरों को लाने के लिए नियम में बदलाव किए जा रहे हैं। इसके लिए एम्स प्रशासन गवर्निंग बॉडी से विशेष प्रस्ताव पास कराने की तैयारी में हैं। इससे देश के दूसरे एम्स के डॉक्टर अनबुंध के तहत मरीजों का इलाज करेंगे।
एक ही सिस्टम से जुड़ेंगी सभी जांचें
निदेशक ने बताया कि एम्स में मरीजों की दो तरह की जांच होती हैं। एक एम्स प्रशासन कराता है। जबकि, दूसरी जांच हिंद लैब की तरफ से कराई जाती है। यह रिपोर्ट अभी मरीजों को अलग-अलग एप पर मिलती है। जल्द ही इसके लिए एक नया एप विकसित किया जा रहा है, जिससें मरीजों को एक ही एप पर एम्स और हिंद लैब की रिपोर्ट मिल सके। इससे मरीजों को रिपोर्ट दिखाने में आसानी होगी।
इसे भी पढ़ें: एक साथ जली मां-बेटी की चिता, नम हो गईं सबकी आंखें
एम्स में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी
देश दीपक वर्मा ने बताया कि एम्स प्रशासन ने विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने का फैसला लिया है। एम्स में 13 क्लीनिकल ब्रांच हैं। इनमें डॉक्टरों के कई पद रिक्त हैं। एम्स प्रशासन इन पदों पर डॉक्टरों की भर्ती करेगा। इससे मरीजों के इलाज में आसानी होगी।
किडनी की बीमारी से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। गोला ब्लॉक के भरौली गांव में बांबे इंटलीजेंस सिक्योरिटी (बीआईएस) ने 10 बेड की डायलिसिस यूनिट तैयार की है। इसमें कोई भी मरीज एक रुपये खर्च कर डायलिसिस करा सकता है। इसका उद्घाटन 29 मार्च को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। अच्छी बात यह है कि किट से लेकर दवाओं तक का खर्च कंपनी ही करेगी।
बीआईएस के महाप्रबंधक मनोज सिंह ने बताया कि यूनिट का खर्च हर माह करीब 10 से 11 लाख रुपये आएगा। इसके लिए कंपनी ने पहले ही 25 करोड़ की एफडी कराई गई है। इसी एफडी के ब्याज से डायलिसिस का सभी खर्च निकल जाएगा। यह यूनिट संस्थान के संस्थापक आरएन सिंह की स्मृति में तैयार की गई है। डायलिसिस के लिए कोई भी व्यक्ति आ सकता है। पहले आने वाले लोगों को मौका दिया जाएगा। बेड फुल होने के बाद मरीजों को बाद में बुलाया जाएगा।