गठन के बाद तकरीबन सभी पंचायतों का कोरोना से ग्रामीणों का बचाव ही मुख्य एजेंडा बन गया है। ग्राम सभा की पहली बैठक में भी इसी पर मंथन हुआ और ढेर सारे सुझाव भी पंचायतों से आए जिन्हें पंचायतीराज विभाग ने शासन को भेजा है। दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी के मूल मंत्र के साथ ही किसी पंचायत ने मास्क नहीं लगाने पर गांव में भी कार्रवाई की पैरवी की है तो किसी ने नियमित सैनिटाइजेशन और लोगों को हर घंटे साबुन से हाथ धोने के प्रति जागरूक करने को जरूरी बताया है।
किसी पंचायत ने गांव में नाली, गली साफ कराने, सोडियम हाइपोक्लोराइड का छिड़काव कराने का निर्णय लिया है। सभी ने अपनी-अपनी पंचायतों में निगरानी समितियों को सक्रिय करने और उनके कार्यों पर नजर रखने का निर्णय किया है। कुछ ने निगरानी समिति में शामिल आशा से लोगों के स्वास्थ्य के बारे में प्रतिदिन रिपोर्ट ग्राम पंचायत समिति को देने को कहा है।
कुछ गांवों ने सुझाव दिया कि जो लोग गांव में बाहर से आ रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से 21 दिनों के लिए आइसोलेट किया जाए। जिनके पास घर छोटा है उनके लिए गांव के विद्यालय, पंचायत भवन में व्यवस्था की जाए।
861 पंचायतों में गठित हो गईं समितियां
ग्राम पंचायतों के गठन के बाद सभी 861 पंचायतों में पंचायतीराज विभाग छह तरह की समितियों का गठन कराने में कामयाब हो गया है। पहले इन समितियों का गठन दो-दो, तीन-तीन साल यहां तक की कार्यकाल खत्म होने तक नहीं हो पाता था। ग्राम पंचायतों के गठन को लेकर शासन हर बात सार्वजनिक करने की योजना पर काम कर रहा है। यही वजह है कि इस बार पहली ही बैठक में समितियों का गठन करा लिया गया है।
जिन समितियों का गठन हुआ है, उनमें प्रशासनिक समिति, नियोजन समिति, शिक्षा समिति, जल प्रबंधन एवं पेयजल समिति के पदेन अध्यक्ष प्रधान बने हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति तथा निर्माण समिति में ग्राम पंचायत सदस्यों में से अध्यक्ष चुने गए हैं। हर माह इन समितियों की बैठक भी होगी। समितियों का दायित्व अलग-अलग कार्यों पर नजर रखने का होगा।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने बताया कि संगठित होने वाली लगभग सभी ग्राम पंचायतों में छह जरूरी समितियों का गठन कर लिया गया है। गठन के बाद हर पंचायत कोरोना से बचाव पर ही चर्चा कर रही है और योजनाएं बना रही है। कई पंचायतों से कार्ययोजना प्राप्त हुई है, उनमें से कुछ कार्ययोजनाओं को शासन को भेजा गया है।