- रीढ़ की हड्डी में पीठ की निचली हड्डी के जुड़ाव को एलटू हो गया था फ्रैक्चर
- हेमीलैमिनेक्टॉमी तकनीक से ऑपरेशन कराने के लिए दूसरे शहर जाना पड़ता था, अब एम्स में होगा ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) के उपचार में एक नई उपलब्धि हासिल की है। पहली बार एम्स के चिकित्सकों ने मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी से बलिया की 50 वर्षीय रोगी महिला की स्पाइनल की सफल सर्जरी की है। महिला के कमर की दूसरी कशेरुका (एलटू) में गंभीर फ्रैक्चर हो गया था, जिससे उसका पूरा नियंत्रण उसकी दैनिक क्रियाओं से हट गया था।
ऐसे में बिना ऑपरेशन इस समस्या से निजात मिलना असंभव था। एम्स के चिकित्सकों ने जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या का सफल ऑपरेशन कर इस समस्या का समाधान कर दिया। एम्स के डॉक्टरों ने इस जटिल स्थिति में मिनिमली इनवेसिव पोस्टीरियर लॉन्ग-सेगमेंट पेडिकल स्क्रू फिक्सेशन, इंडेक्स लेवल स्क्रू ऑगमेंटेशन तथा पोस्टीरियर डिकम्प्रेशन (हेमीलैमिनेक्टॉमी) तकनीक का उपयोग कर महिला का सफल ऑपरेशन किया। इस आधुनिक तकनीक से रीढ़ की हड्डी को स्थिर किया जाता है, जिसमें बहुत छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे ऑपरेशन में कम रक्तस्राव होता है। दर्द कम रहता है और रोगी जल्दी स्वस्थ होता है।
इस सर्जरी को आर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष प्रो. अजय भारती के नेतृत्व में संपन्न कराया गया। उन्होंने बताया कि मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी जटिल फ्रैक्चर के मामलों में अत्यंत प्रभावी है, और ऑपरेशन के बाद मरीज की रिकवरी को तेज बनाती है। ईडी मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. विभा दत्ता ने इस सफल ऑपरेशन पर प्रसन्नता जताई। उनका कहना है कि टीम ने जो उत्कृष्ट कार्य किया है, वह संस्थान की क्षमता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस तरह की जटिल सर्जरी पहले केवल महानगरों के बेहद प्रभावी अस्पतालों में ही संभव थी। अब एम्स गोरखपुर ने यह साबित कर दिया है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी अत्याधुनिक स्पाइनल सर्जरी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इस ऑपरेशन में हड्डी विभाग के अलावा सर्जरी में एम्स की एनेस्थीसिया टीम के अलावा डॉ. प्रियंका द्विवेदी और उनकी टीम मौजूद रही।
क्या होती है कशेरुका
रीढ़ की हड्डी (स्पाइल) के एल वन से एन फाइव तक के हिस्से को कटि-रीढ़ (लंबर स्पाइन) कहते हैं, जो पीठ के निचले हिस्से में होती है। ये बड़ी मजबूत हड्डियां (कशेरुकाएं) होती हैं, जो शरीर का अधिकांश भार उठाती हैं, और कूल्हों, पैरों व पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियों के कार्यों को नियंत्रित करती हैं, और इनमें चोट या समस्या (जैसे स्लिप डिस्क) होने पर निचले अंगों में दर्द, साइटिका या कमजोरी हो सकती है। एल वन सबसे ऊपर और एल फाइव सबसे नीचे (अंतिम) वाली स्पाइन होती है।