साल्ट की मात्रा 90 प्रतिशत से कम होने पर ही होगी कार्रवाई
ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने बताया कि अगर किसी दवा में साल्ट की मात्रा उसके रैपर पर प्रदर्शित मात्रा के सापेक्ष 90 प्रतिशत तक मिलता है, तो ऐसे मामले में केवल निर्माता कंपनी को नोटिस जारी होता है। मान लीजिए कि दवा 100 एमजी की है और जांच में 90 एमजी तक मिलती है तो इसे सामान्य माना जाता है।
वहीं, 89 से 85 ग्राम के बीच होने पर इस पर चेतावनी जारी होगी। लेकिन, अगर 85 प्रतिशत से कम है तो इसे अधोमानक माना जाएगा।
वहीं, अगर साल्ट 50 प्रतिशत से भी कम है, तब उसे नकली मानकर कार्रवाई होगी। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि अगर दवा में साल्ट की मात्रा काफी कम मिलती है, तो निर्माता कंपनी पर केस दर्ज कराया जाता है। तब उसका लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है।
अधोमानक मामलों में भी औषधि नियंत्रक की तरफ से संबंधित दवाओं को बाजार से वापस लेने का आदेश निर्गत होता है। अपने यहां से भेजे गए जिन आठ सैंपल के नमूने फेल हुए हैं, उनके दवा खरीद से संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जा रही है।