पांच बार एमएलसी और विधान परिषद के सभापति गणेश शंकर पांडेय भी छात्र राजनीति से ही तपकर निकले हैं। वे छात्रसंघ चुनाव तो नहीं लड़े, लेकिन छात्र राजनीति में हमेशा सक्रिय रहे। गोरखपुर विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय से छात्रसंघ अध्यक्ष रहे रवींद्र सिंह भी 1977 में कौड़ीराम से विधायक चुने गए। रवींद्र सिंह का अपने क्षेत्र में प्रभाव इतना ज्यादा था कि उनके निधन के बाद पत्नी गौरी देवी तीन बार विधायक चुनी गईं। इसी प्रकार पिपराइच विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर विधायक और फिर मंत्री बने जितेंद्र जायसवाल उर्फ पप्पू भइया भी डीएवी डिग्री कॉलेज में छात्रसंघ की राजनीति करते थे।
इलाहाबाद विवि छात्रसंघ अध्यक्ष रहे पूर्व सांसद बृजभूषण
बस्ती से सांसद रहे बृजभूषण तिवारी भी छात्र राजनीति से ही निकले थे। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। वे समाजवादी आंदोलन में भी सक्रिय रहे।
इन्होंने भी प्रयास किया पर सफल नहीं हुए
कई ऐसे भी छात्रसंघ के पदाधिकारी और छात्रनेता रहे, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में जोर आजमाइश की पर सफल नहीं हुए। हालांकि, इन इन नेताओं ने स्थानीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे अशोक कुमार श्रीवास्तव ने शहर विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसी तरह पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दिनेश चंद्र श्रीवास्तव ने शहर विधानसभा और महामंत्री रहे विनय कुमार सिंह विन्नू ने भी चौरीचौरा विधानसभा से चुनाव लड़ा। लेकिन, सदन में पहुंचने में कामयाब नहीं हुए।