सरहरी (गोरखपुर)। गुलरिहा थाना क्षेत्र के बिस्टौली गांव के लक्षन की 20 साल पहले मौत हो गई थी। अब एक मामले में पुलिस ने उनके खिलाफ मारपीट और धमकी की धारा में प्राथमिकी दर्ज की है। मामला दर्ज होने के बाद से ही यह क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। लोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, ग्रामसभा बिस्टौली निवासी चंद्रिका और रामभवन के घर आने-जाने के लिए लगभग 20 वर्ष पहले एक रास्ता बनाया गया था। आरोप है कि बुधवार को मनराज उस रास्ते पर दीवार खड़ी कर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। इसी को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और मारपीट हो गई। घटना के बाद पुलिस ने स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, आपराधिक धमकी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की।
मनराज की पत्नी कुमारी देवी की तहरीर के आधार पर दर्ज प्राथमिकी में पुलिस ने रामभवन, लक्षन, संदीप और रामअशीष को नामजद किया है। मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब ग्रामीणों ने बताया कि नामजद आरोपी लक्षन की मौत लगभग 20 साल पहले हो चुकी है। ग्राम प्रधान रामनगीना सिंह समेत कई ग्रामीणों ने इसे पुलिस की गंभीर लापरवाही बताया है। उनका कहना है कि बिना सत्यापन के प्राथमिकी दर्ज करना जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है।
लक्षन के परिजनों का कहना है कि एक दिवंगत व्यक्ति को आरोपी बनाना न केवल कानूनी त्रुटि है, बल्कि परिवार के लिए मानसिक पीड़ा का कारण भी है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दर्ज प्राथमिकी में तत्काल संशोधन की मांग की है।
इस संबंध में गुलरिहा थाना प्रभारी इत्यानंद पांडेय ने बताया कि तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। यदि जांच में यह स्पष्ट होता है कि नामजद व्यक्ति की पूर्व में मौत हो चुकी है, तो नियमानुसार नाम हटा दिया जाएगा।