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यूपी में एनकाउंटर: 'जुबैर जैसा हश्र सभी हत्यारों को हो...', जुबैर के साथी वहाब की तलाश, मेरठ से सिवान तक दबिश

Sun, 28 Sep 2025 03:23 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

गोरखपुर के छात्र दीपक गुप्ता की मां सीमा देवी का कहना है कि बेटे ने किसी का बुरा नहीं किया, किसी को दुख नहीं दिया फिर भी पशु तस्करों ने उसे बेरहमी से मार डाला। एक तस्कर जुबैर के एनकाउंटर से थोड़ी राहत जरूर मिली है लेकिन जब तक बाकी हत्यारों का हाल भी उस जैसा नहीं होगा, तब तक उनके कलेजे को ठंडक नहीं मिलेगी।
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UP Encounter Zubair - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोरखपुर के पिपराइच के महुआचाफी गांव में 15 सितंबर को छात्र दीपक गुप्ता की हत्या ने गांव से लेकर प्रदेश स्तर तक सभी को हिलाकर रख दिया है। ईंट से कूचकर की गई जघन्य वारदात के पीछे पशु तस्करों के नेटवर्क की भूमिका सामने आने के बाद एसटीएफ कार्रवाई में जुटी है। एसटीएफ पशु तस्करों के नेटवर्क में सेंध लगाते हुए मेरठ से लेकर सिवान तक दबिश की कार्रवाई कर रही है।
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दीपक हत्याकांड के मुख्य आरोपी रामपुर के शहर कोतवाली के मुहल्ला घेर मर्दान खां निवासी जुबैर उर्फ कालिया शुक्रवार रात पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। वहीं कुशीनगर निवासी रहीम, गीडा के नौसड़ निवासी छोटू, राजू और राम लाल को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भिजवा चुकी है। 

वहीं बिहार के गोपालगंज निवासी मन्नू सेठ ने बिहार कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। वहीं उसका पार्टनर कुशीनगर निवासी वहाब भागा हुआ है। उसकी पूरी गैंग पर शिकंजा कसने की तैयारी चल रही है।
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एसटीएफ सूत्रों के मुताबिक, जुबैर का खास पार्टनर वहाब लंबे समय से इस नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था। उसकी भूमिका भी गहन जांच के दायरे में है। सूत्र बताते हैं कि वहाब के पांच खास साथी एसटीएफ की रडार पर हैं। इनमें से कुछ के तार बिहार के सिवान और गोपालगंज तक जुड़े हुए हैं, जबकि कुछ का कनेक्शन पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मेरठ और बागपत तक फैला है। एसटीएफ ने इन सभी संभावित ठिकानों पर दबिश देने के लिए टीम गठित कर दी है।

घर में ताला बंद कर वहाब के साथ परिजन भी भागे
वहाब का परिवार संतकबीरनगर स्थित मकान में रह रहा था। दीपक हत्याकांड के बाद से यहां ताला बंद है। आस-पड़ोस के लोग बताते हैं कि घटना के पर्दाफाश के बाद से ही वहाब के घरवाले मकान छोड़कर भाग गए हैं। पुलिस को अंदेशा है कि परिवार के लोग भी भागे आरोपियों को छुपाने और उन्हें मदद पहुंचाने में भूमिका निभा सकते हैं। इस कारण उनकी गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जा रही है।
 

एसटीएफ का पशु तस्करों के नेटवर्क पर फोकस
एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता इस नेटवर्क को तोड़ना और इसमें शामिल हर चेहरे को बेनकाब करना है। जांच में सामने आया है कि जुबैर और वहाब जैसे लोग केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि राज्य और अंतरराज्यीय स्तर पर भी सक्रिय थे। पशु तस्करी के साथ-साथ इनके तार हथियारों की अवैध आपूर्ति और फर्जी दस्तावेजों के कारोबार से भी जुड़े पाए गए हैं।

 

जुबैर जैसा हश्र सभी हत्यारों को हो तभी मिलेगी कलेजे को ठंडक
गोरखपुर के पिपराइच क्षेत्र के महुआ चाफी गांव का छात्र दीपक गुप्ता अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन परिवार हर दिन उसकी कमी महसूस कर रहा है। दीपक की मां सीमा देवी का कहना है कि बेटे ने किसी का बुरा नहीं किया, किसी को दुख नहीं दिया फिर भी पशु तस्करों ने उसे बेरहमी से मार डाला। एक तस्कर जुबैर के एनकाउंटर से थोड़ी राहत जरूर मिली है लेकिन जब तक बाकी हत्यारों का हाल भी उस जैसा नहीं होगा, तब तक उनके कलेजे को ठंडक नहीं मिलेगी।

बेटे दीपक को याद कर मां सीमा देवी का चेहरा बार-बार आंसुओं से भीग जाता है। पिता दुर्गेश की आंखें निराश होकर सूनी पड़ गई हैं। चाचा सुरेंद्र और भाई प्रिंस ने कहा कि दीपक सिर्फ उनका बेटा या भाई नहीं था बल्कि पूरे गांव का सपना था। वह डॉक्टर बनकर न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव का नाम रोशन करना चाहता था।
 

15 सितंबर की रात पशु तस्करों ने बेरहमी से ईंट से कूचकर दीपक को मौत के घाट उतार दिया था। जिस जगह से उसकी लाश बरामद हुई, वहां आज भी लोग जाते हुए सहम जाते हैं। गांव के लोग कहते हैं कि दीपक शांत स्वभाव का लड़का था, उसकी किसी से दुश्मनी नहीं थी। इधर, शुक्रवार को मुख्य आरोपी जुबैर के मारे जाने की सूचना पर आसपास के गांव के लोग दीपक के घर के पास स्थित मंदिर पास एकत्रित होकर बातचीत करते हुए नजर आए।
 

आत्मा की शांति के लिए किया गया अनुष्ठान
जुबैर के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद शनिवार को दीपक की आत्मा की शांति के लिए परिवार ने जंगल धूसड़ स्थित एक मंदिर में अनुष्ठान कराया। बाबा खरबान, पिता दुर्गेश, चाचा सुरेंद्र और भाई प्रिंस समेत परिवार व गांव के कई लोग वहां मौजूद रहे। पूजा-पाठ के दौरान माहौल बेहद भावुक था। हर किसी की आंखें नम थीं। ग्रामीण भी इस अनुष्ठान में शामिल हुए और दीपक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

 

गांव में आक्रोश और डर
दीपक की हत्या के बाद गांव में आक्रोश और डर दोनों है। लोग खुलेआम कहते हैं कि जब तक इस हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों को पकड़ा नहीं जाता, गांव को चैन नहीं मिलेगा। एक आरोपी के एनकाउंटर से लोगों को थोड़ी तसल्ली जरूर मिली, लेकिन परिवार का दर्द अब भी जस का तस है। 
 

वहीं मां सीमा देवी बार-बार यही दोहराती हैं कि उनका बेटा वापस नहीं आएगा, लेकिन जब तक उसके हत्यारों को सजा नहीं मिलेगी, उसकी आत्मा भी तड़पती रहेगी। यह शब्द पूरे गांव में गूंजते हैं और हर सुनने वाले का दिल दहला देते हैं। दीपक का सपना अधूरा रह गया, लेकिन गांव वाले कहते हैं कि उसकी याद हमेशा उनके बीच जिंदा रहेगी। परिवार अब न्याय की आस लगाए बैठा है ताकि दीपक की आत्मा को सच्ची शांति मिल सके।
 
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एसटीएफ की सख्ती से बढ़ी उम्मीद
पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई ने गांव वालों में उम्मीद जगा दी है। लोग कहते हैं कि जिस तरह जुबैर का अंत हुआ, उसी तरह बाकी आरोपियों को भी सजा मिलनी चाहिए। एसटीएफ ने दावा किया है कि जल्द ही वहाब और उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी होगी जिससे इस संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकेगा।
 
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