16 अक्तूबर को इंदौर के साइबर सेल के निरीक्षक अंबरीश मिश्रा की टीम गोरखपुर आई और दोनों टीमों ने मिलकर उसी दिन तिवारीपुर के कल्याणपुर कालिके निवासी सैयदा बेगम को राजघाट के अमरूद मंडी के पास से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सैयदा बेगम ने बताया कि उसके गिरोह में तिवारीपुर के निजामपुर निवासी परवेज अहमद, गोसीपुरा निवासी गयासुद्दीन खान उर्फ सानू व मूलरूप से बांसगांव निवासी आशीष जायसवाल भी शामिल हैं। आशीष वर्तमान में शाहपुर के राप्तीनगर में रहता है।
इसके बाद टीम ने परवेज अहमद को रामगढ़ताल के रूस्तमपुर ढाला, गयासुद्दीन तथा आशीष को राजघाट के घोषीपुर से पकड़ लिया। इनके पास से टीम ने पांच आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, एक एटीएम कार्ड, छह मोबाइल फोन व सात हजार रुपये बरामद किए हैं। एसटीएफ के अनुुसार पुलिस को सैयदा बेगम का जो आधार कार्ड मिला है उसमें दो अलग-अलग पते हैं।
एसटीएफ के अनुसार, पकड़े गए आरोपितों ने बताया कि सैयदा बेगम के आधार कार्ड में बार-बार पता बदलवाकर विभिन्न बैंकों में खाता खुलवाया जाता है। खाता खुलने के बाद एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक को परवेज, आशीष तथा गयासुद्दीन अपने पास रख लेते हैं। जब खाते में फ्राड की रकम आ जाती है तो गयासुद्दीन एटीएम से रकम निकाल लेता था। उन पैसों को आशीष अलग-अलग खातों में आनलाइन ट्रांसफर कर देता था। अगर किसी खाते में रकम के ट्रांजेक्शन में दिक्कत आती तो सैयदा बेगम व परवेज पति-पत्नी बनकर बैंक जाकर पता करते और चेकबुक से रकम निकाल लेते। निकाली गई रकम को पहले से तय प्रतिशत के हिसाब से आपस में बांट लेते।
पूछताछ में बताया कि इंदौर से जो रकम मंगाई गई थी उसमें आशीष के दो साथियों अकरम व प्रतीक ने मदद की थी। प्रतीक व अकरम दिल्ली में रहते हैं। उनका इंदौर में आना जाना रहता है। उन्हीं दोनों ने ई-मेल आईडी को हैक कर उसकी फिशिंग कर फर्जी मेल किया और रकम अपने खाते में मंगा ली।
अकरम ने जब फोन कर बताया कि रकम खाते में आ गई है तब गयासुद्दीन ने दो बार में एटीएम से अस्सी हजार व आशीष ने दो लाख रुपये का आईएमपीएस मनोज नाम के व्यक्ति के खाते में कर दिया। टीम के अनुसार इस तरह इन लोगों ने अलग अलग राज्यों के खातों से लाखों रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करवाकर निकाले हैं। सैयदा को महिला थाने तथा अन्य आरोपितों को तिवारीपुर थाने में दाखिल कर इंदौर पुलिस कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड लिया और सभी को मध्यप्रदेश ले गई।