गुणवत्ता जांचने में खाद कारखाने को भी होगी सहूलियत
अगर गोरखपुर की फैक्ट्रियों को अनुपूरक उद्योगों का दर्जा मिल जाए तो खाद कारखाने को आपूर्ति संबंधी उत्पादों की गुणवत्ता जांचने में भी काफी सहूलियत होगी। इसके अलावा उनके लिए यह आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित होगा। उत्पादों की गुणवत्ता जांचने के लिए उन्हें अपनी टीम को ना सिर्फ बहुत कम दूर भेजना पड़ेगा, बल्कि समय की भी बचत होगी। ट्रांसपोर्टेशन पर आने वाले खर्च में भी कमी आएगी।
पॉलीफैब श्रीकृष्णा के निदेशक भोला जायसवाल ने कहा कि गोरखपुर खाद कारखाने के खुलने से हमें काफी उम्मीदें थी। हम अपने उत्पादों की आसानी से सप्लाई कर सकते थे, लेकिन ऐसा होता नहीं दिखाई दे रहा है। अनुपूरक उद्योग का दर्जा नहीं मिलने की वजह से पहले जहां, प्लास्टिक की बोरियां तैयार करने संबंधी दो फैक्ट्रियां लगाने की योजना थी, अब सिर्फ एक फैक्ट्री ही लगा रहे हैं। इसमें 100 से डेढ़ सौ लोगों को रोजगार मिलेगा। दो फैक्ट्रियां खुल जातीं तो कम से कम 300 लोगों को रोजगार मिलता।
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज अध्यक्ष विष्णु अजीत सरिया ने कहा कि खाद कारखाने द्वारा गोरखपुर की फैक्ट्रियों को अनुपूरक उद्योगों का दर्जा अवश्य दिया जाना चाहिए। यह सिर्फ गोरखपुर के उद्योगों के लिए ही नहीं खाद कारखाने के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। उन्हें बहुत ही कम समय में अपनी फैक्ट्री की जरूरत संबंधित उत्पाद आसानी से मिल सकेंगे। अगर उन्हें क्वालिटी जांचने की आवश्यकता पड़ेगी, तब भी वह दूरी कम होने की वजह से आसानी से कर सकते हैं।