ओवरलोड ट्रकों से वसूली कर पास कराए जाने के प्रकरण की जांच अब प्रदेश स्तरीय एसआईटी करेगी। 21 जिलों से जुड़ा मामला होने की दलील देकर विवेचना को ट्रांसफर करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। हालांकि गोरखपुर एसआईटी में रहे अफसरों को भी उसमें सदस्य बनाए जाने पर चर्चा चल रही है।
जानकारी के मुताबिक, 24 जनवरी को गोरखपुर एसटीएफ यूनिट ने ओवरलोड वाहनों को वसूली कर पास कराने वाले एक गिरोह का खुलासा किया था। सरगना धर्मपाल सिंह और मनीष सिंह उर्फ सिब्बू सिंह सहित छह लोगों को बेलीपार के मधुबन ढाबा से गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ बेलीपार थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एसटीएफ ने जो फर्द तैयार की थी, उसमें 21 जिलों तक गिरोह के फैले होने की बात सामने आई थी। यही नहीं, 16 जिलों के आरटीओ विभाग के अफसर, सिपाही और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली। एसटीएफ ने उन सभी के नाम और उनके कारनामों का जिक्र फर्द में किया था।
एसएसपी डॉ. सुनील गुप्ता ने मामले की तह तक जाने के लिए सीओ कैंट सुमित शुक्ला के नेतृत्व में एसआईटी बनाई। एसआईटी ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिसमें बस्ती और संतकबीरनगर के एआरटीओ प्रभारी तथा देवरिया जिले के सिपाही और एक एआरटीओ का प्राइवेट चालक शामिल है। इसके अलावा सात जिलों के एआरटीओ और उनके कर्मचारियों के खिलाफ एसआईटी ने नोटिस जारी किया है। इन सब के अलावा एसआईटी गोरखपुर जेल में दो बार जाकर गिरोह के लोगों से पूछताछ कर चुकी है। मोबाइल लॉक खुलवाने के साथ ही रजिस्टर पर लिखे कोड को भी डीकोड कराया गया है। इन सबके बीच ही गोरखपुर के अफसरों से केस ट्रांसफर करने पर फैसला कर लिया गया है।