फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजकीय बौद्ध संग्रहालय: तीसरी शताब्दी की मुहर, सिक्के के सांचे, जैन मूर्तियों से खुलेंगे अतीत के राज

Thu, 20 Feb 2020 12:48 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर

सार

  • तीसरी शताब्दी की मुहर, सिक्के के सांचे, जैन मूर्तियों से खुलेंगे अतीत के राज
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग लखनऊ की टीम ने बौद्ध संग्रहालय से जुटाए साक्ष्य
  • कई शताब्दी पुरानी इन कलाकृतियों पर लिखे अभिलेखों को सहेज रही टीम
विज्ञापन
राजकीय बौद्ध संग्रहालय में रखे प्राचीन सिक्कों के सांचे। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इतिहास खुद को जानने और समझने के हजार मौके प्रदान करता है लेकिन ये हमारे ऊपर है कि हम उसे कितना समझ पाते हैं। उसी के सहारे हम अपने वर्तमान और फिर भविष्य को संवार पाते हैं। कुछ इसी मकसद से राजकीय बौद्ध संग्रहालय में तृतीय शताब्दी (कुषाण काल) से लेकर 13वीं शताब्दी तक की संरक्षित जैन, महावीर, बौद्ध स्तूप, मोहर, सिक्कों के सांचे सरीखी अन्य कलाकृतियों पर लिखे अभिलेखों को संरक्षित करने की कवायद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग लखनऊ की टीम ने शुरू कर दी है।
विज्ञापन


पुरालेखविद् डॉ. राजेश कन्नौजिया की अगुवाई में टीम पहुंची। मकसद है, हजारों वर्ष पुरानी कलाकृतियों के उस दौर के अनसुलझे राज का पता लगाना। इस जानकारी को वहां आने वाले दर्शकों को देने के साथ ही अनुसंधान के लिए भी इस्तेमाल की जा सकेगी।

राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उपनिदेशक डॉ. मनोज गौतम ने बताया कि हजारों वर्ष पुरानी इन कलाकृतियों के बारे में पता लगाने में अहम भूमिका इन पर लिखे अभिलेखों के जरिए मिलती है। पुरातत्व विभाग की ओर से सैंपल जुटाया गया है। रिपोर्ट तैयार होते ही उसकी प्रतियों को यहां बौद्ध संग्रहालय में भी लगाया जाएगा।
विज्ञापन


ब्राह्मी, खरोष्ठी लिपियों में लिखे गए हैं अभिलेख
राजकीय बौद्ध संग्रहालय में जो कलाकृतियां संरक्षित है उनमें कई लिपियों में उस दौर से जुड़ी अहम जानकारियां उकेरी हुई हैं। इन्हें संरक्षित किया जा रहा है। कलाकृतियों पर ज्यादातर ब्राह्मी  और खरोष्ठी लिपियों में अभिलेख लिखे हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें