तनाव से ग्रसित लोगों को नई ऊर्जा देगा योग : हरिवंश चित्तवृत्तियों का निरोध करना ही योग : स्वामी वासुदेवानन्द महायोगी श्री गुरु गुरुगोरक्षनाथ शोधपीठ के वेबिनार का उदघाटन सत्र अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि नाथ दर्शन तथा उसके सामाजिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक आयामों को पूरी दुनिया को जानना चाहिए। आज जब सारी दुनिया में लोग अवसाद तथा तनाव से ग्रसित हो रहे है तो ऐसे समय में योग उन्हे नई उर्जा देने का कार्य कर रहा है। पूर्व उपसभापति रविवार को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर महायोगी गुरु श्रीगोरक्ष नाथ शोध पीठ द्वारा दो द्विवसीय राष्ट्रीय वेवीनार के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। 'नाथ पंथ का सामाजिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक आयाम' विषय पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि हमारी सांस्कृतिक पहचान ही हमारी उर्जा है और यह शोध पीठ इस उर्जा को फैलाने का कार्य करेगी। विशिष्ट अतिथि जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती ने कहा कि चित्तवृत्तियों का निरोध करना ही योग है। उन्होने अष्टांग योग का वर्णन करते हुए बताया कि कुण्डलनी शक्ति को जागृत करना योग का महत्वपूर्ण अंग है। अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो वीके सिंह ने शोध पीठ की महत्ता को रेखाकिंत करते हुए नाथ पंथ के आध्यात्मिक और भौतिक पहलुओ पर प्रकाश डाला। उन्होने वर्तमान महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि योग और हठ योग शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता को बढाने में लाभकारी है। नाथपंथ की वैज्ञानिकता को उन्होने नाड़ी शोधन के माध्यम में जो कि नाथ पंथ में वर्णित योग के द्वारा किया जा सकता है स्पष्ट किया। डॉ हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के कुलाधिपति बलवन्त शान्ति लाल जानी ने नाथपंथ के विविध आयामों की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होने कहा नाथ पंथ को वैश्विक मान्यता प्राप्त है इसका जुड़ाव सामाजिक और वैज्ञानिक है। नाथपंथ का साहित्य लगभग सभी भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। उन्होने कहा नाथ पंथ व्यक्ति नही विचारधारा है। इसका सभी के साथ संवाद है। कार्यक्रम का सफल संचालन एवं अतिथियो के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रो रविशंकर सिंह ने दिया।