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Vat Savitri Vrat 2020: वट सावित्री व्रत को खास बनाएगा ये योग, जानिए क्या है वट वृक्ष के पूजन की मान्यता

Thu, 21 May 2020 04:12 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
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वट वृक्ष की पूजा करती महिलाएं।(file) - फोटो : अमर उजाला
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वट सावित्री व्रत का पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। महिलाएं पतियों के दीर्घायु के लिए इस व्रत को करेंगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री अपने पति के प्राणों को यमराज से छुड़ाकर ले आई थी। इस दिन वट (बरगद) का पूजन होता है।

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इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं। इस बार इस व्रत को छत्र नामक महाऔदायिक योग खास बनाएगा। इस योग से व्रती महिलाओं को भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होगी।

वट सावित्री व्रत पूजन विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि इस दिन बांस की दो टोकरी लें। उनमें सप्तधान्य (गेहूं, जौ, चावल, तिल, कांगुनी, सॉवा, चना) भर लें। उन दोनों मे से एक पर ब्रह्मा और सावित्री तथा दूसरी टोकरी में सत्यवान और सावित्री की प्रतिमा स्थापित करें। यदि उनकी प्रतिमाएं न हो तो मिट्टी या कुश में ही परिकल्पित कर स्थापित करें।
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वटवृक्ष के नीचे बैठकर ब्रह्मा-सावित्री का, उसके बाद सत्यवान एवं सावित्री का पूजन कर लें। सावित्री के पूजन में सौभाग्य वस्तुएं (काजल, मेहंदी, सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, वस्त्र, आभूषण, दर्पण इत्यादि) चढ़ाएं। अब माता सावित्री को अर्घ्य दें। इसके बाद वटवृक्ष का पूजन करें।

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वट वृक्ष के पूजन की ये है मान्यता

वट वृक्ष के पूजन के बाद उसकी जड़ों में प्रार्थना के साथ जल अर्पण करें। वटवृक्ष की परिक्रमा करते हुए उसके तने पर 108 बार कच्चा सूत लपेटें। यदि इतना न कर सकें, तो 28 बार अवश्य परिपालन करें। पूजा के अंतिम में वटसावित्री व्रत की कथा सुने।

पंडित बृजेश पांडेय ने बताया कि वट सावित्री व्रत में प्राचीन समय से बरगद के पेड़ की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। इसमें एक पौराणिक कथा भी जुड़ी है। मान्यता है कि कि वट वृक्ष ने ही सत्यवान के मृत शरीर को अपनी जटाओं के घेरे में सुरक्षित रखा था जिससे कोई उसे नुकसान न पहुंचा सकें।

इसलिए वट सावित्री व्रत में प्राचीन समय से बरगद की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि बरगद के वृक्ष में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास होता है। इसकी पूजा करने से पति के दीर्घायु होने के साथ ही उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
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