स्वास्थ्य विभाग ने ऑडिट कराने का लिया फैसला
आठ माह के अंदर 49 गर्भवतियों की हो चुकी है मौत
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गर्भवतियों की हो रही मौत का सही कारण जानने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑडिट कराने का फैसला लिया है। टीम में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के अलावा बाल रोग विशेषज्ञों की टीम को शामिल किया गया है। टीम यह पता करने की कोशिश करेगी कि आखिर मौत की सही वजह क्या थी? और किन कारणों से मौत को रोका नहीं जा सका।
गर्भवतियों की मौत की सही जानकारी के लिए शासन ने ऐसे मामलों का ऑडिट कराने का फैसला लिया है। इसके तहत उन केस को दर्ज किया गया है, जिसमें गर्भवतियों की मौत हुई और वह मामले स्वास्थ्य विभाग की पकड़ में आए हैं। इसके तहत पिछले आठ माह के अंदर 49 ऐसे मामले सामने आए हैं।
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि गर्भवतियों की मौत का ऑडिट कराने का उद्देश्य केवल इतना है कि उन मौतों को रोका जा सके। क्योंकि, एक बार अगर कारण पता चल जाएगा, तो उस पर काम किया जाएगा। क्योंकि, अब तक जो मामले सामने आए हैं, उनमें 90 फीसदी मामले ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। प्रथम दृष्टया यह जानकारी मिली है कि समय-समय पर इनकी जांच नहीं हुई है। फिलहाल पूरे मामले के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों को शामिल किया गया है, जो ऑडिट कर मौत का कारण जानेंगे।