हम आपकों गोरखपुर की सपना के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी शादी के चंद वर्षों में ही पति से रिश्ता टूट गया। बता दें कि रिश्ता टूटने के बाद सपना अपने बेटे के साथ मायके आ गईं। सपना ने यहां मां-बाप पर बोझ बनने की जगह उनका सहारा बनने की ठानी। मां ने अचार बनाने का हुनर सिखाया था, तो इसे ही रोजगार का माध्यम बना लिया।
सपना ने पहले तो अचार से अपनी जिंदगी में मिठास घोली, फिर अन्य जरूरतमंद महिलाओं को साथ जोड़कर दो साल पहले अपने गांव सरदारनगर के सरैया में जानकी स्वयं सहायता समूह का गठन किया। वह अब 50 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनने की कला सिखा रहीं हैं।
बता दें कि 2018 में सपना ने जानकी स्वयं सहायता समूह की नींव डाली और गांव एवं उसके आसपास की जरूरतमंद महिलाओं को साथ जोड़ा। बाजार के हिसाब से अचार तैयार करना, उनकी पैकेजिंग और मार्केटिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर समूह ने अचार बनाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे मांग भी बढ़ने लगी। वर्तमान में समूह की अध्यक्ष सीमा और सचिव रीना हर महीने पांच से सात हजार रुपये कमा लेती हैं ,जबकि समूह की अन्य सदस्यों की भी आमदनी तीन से पांच हजार तक है।
सपना के समूह में हैं 12 सदस्य
जानकी स्वयं सहायता समूह में वर्तमान में 12 सदस्य हैं। इनमें अध्यक्ष सपना और सचिव रीना के अलावा रिंकू, रीता, संजू, मीरा, संध्या, सलहंती, सरस्वती, पूनम, विजयलक्ष्मी आदि शामिल हैं।