रामलीला समिति के सबसे पुराने सदस्य 75 वर्ष के डॉ.महंत सिंह बताते हैं कि संत जी ने अपने जीवन में हजारों बार राम चरित्र मानस पूरा पढ़ा था। उनके आह्वान पर सन् 1980 में नवरात्र के प्रथम दिन गांव के हर सदस्य अपने घर से मिट्टी, पुष्प, दूध, जल आदि लेकर पूजा की और रामलीला को अनवरत कराने का संकल्प लिया। तब बिजली के अभाव में लालटेन की रोशनी में कलाकार अभिनय करते थे।
संचालक विकास सिंह श्रीनेत ने कहा कि रामलीला से हमें प्रभु राम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा मिलती है। वहीं दूसरी ओर समाज में लोगों में एकता की भावना रहती है।